अगर शांति वार्ता टूटी तो ट्रंप के लिए कितनी मुश्किलें... ईरान के पास बाकी है हथियारों का 70% जखीरा

अमेरिकी खुफिया आकलनों के मुताबिक, कई हफ्तों की सैन्य कार्रवाई के बावजूद ईरान की ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. उल्टा, उसके पास अभी भी इतना जखीरा बचा है कि वह हालात को किसी भी वक्त विस्फोटक बना सकता है. ईरान के पास अब भी करीब 40% ड्रोन स्टॉक मौजूद है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर खड़ा है. ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की घड़ी खत्म होने को है, लेकिन शांति वार्ता अब भी अनिश्चितता में लटकी है. ऐसे में सवाल सिर्फ युद्ध या शांति का नहीं, बल्कि उस बड़े संकट का है जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और अमेरिकी राजनीति को झकझोर सकता है.

अमेरिकी खुफिया आकलनों के मुताबिक, कई हफ्तों की सैन्य कार्रवाई के बावजूद ईरान की ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. उल्टा, उसके पास अभी भी इतना जखीरा बचा है कि वह हालात को किसी भी वक्त विस्फोटक बना सकता है.

ईरान की सैन्य ताकत: जितना समझा गया, उससे कहीं ज्यादा

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पास अब भी करीब 40% ड्रोन स्टॉक मौजूद है. मिसाइल लॉन्चरों का 60% से ज्यादा हिस्सा सुरक्षित या रिकवर हो चुका है और मलबे में दबे हथियारों को निकालने के बाद यह आंकड़ा 70% तक पहुंच सकता है.

यह भी पढ़ें- श्रीलंका में चीन को साधने के लिए भारत का नया दांव, जानें क्या है वो मास्टरस्ट्रोक

यह कोई सामान्य सैन्य बचत नहीं है. खासकर Shahed-136 जैसे ड्रोन, जिन्हें बड़े पैमाने पर और बेहद कम लागत में तैयार किया जाता है, ईरान की असली ताकत बनकर उभरे हैं. ये ड्रोन भले ही आधुनिक युद्धपोतों द्वारा गिराए जा सकते हों, लेकिन आम कारोबारी जहाजों के पास इनके खिलाफ कोई मजबूत सुरक्षा नहीं होती.

Advertisement

होर्मुज से गुजरती है दुनिया की सांस

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा है. वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है. अगर यह रास्ता बाधित रहा, तो असर हर देश पर पड़ेगा. गौरतलब है कि ईरान बहुत पहले भी इराक जंग के दौरान इस जलमार्ग को माइन बिछाकर बाधित करने की कोशिश कर चुका है. लेकिन अब उसके पास ज्यादा उन्नत हथियार हैं. मिसाइल और ड्रोन हैं जो बिना सीधे टकराव के भी शिपिंग को रोक सकते हैं.

ट्रंप के लिए संकट क्यों गहरा सकता है?

1. तेल की कीमतें और महंगाई का झटका

अगर होर्मुज में तनाव बढ़ता है या शिपिंग बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आएगा. इसका सीधा असर अमेरिका समेत दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा. ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह चुनौती और गंभीर हो सकती है.

Advertisement

2. युद्ध के फैलने का खतरा

अब तक इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई मुख्य रूप से ईरान के रणनीतिक ठिकानों तक सीमित रही है. लेकिन अगर ईरान जवाब में समुद्री रास्तों को निशाना बनाता है, तो अमेरिका पर बड़े स्तर पर सैन्य हस्तक्षेप का दबाव बढ़ेगा. इसका मतलब होगा कि एक सीमित संघर्ष का व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदलना.

3. वैश्विक दबाव और कूटनीतिक संकट

होर्मुज में बाधा का असर सिर्फ अमेरिका या ईरान तक सीमित नहीं रहा है. चीन, यूरोप और खाड़ी देश सीधे प्रभावित हो रहे हैं. अब अगर जंग दोबारा शुरू हुई तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फिर अस्थिरता बढ़ेगी. ऐसे में अमेरिका पर वैश्विक दबाव बढ़ेगा कि वह हालात को नियंत्रित करे, जिससे कूटनीतिक मोर्चे पर भी मुश्किलें खड़ी होंगी.

Featured Video Of The Day
Women Reservation Bill: महिला आरक्षण पर सड़कों पर योगी, लखनऊ में विपक्ष के खिलाफ जन आक्रोश