भारत को खफा कर कैसे ट्रंप ने अमेरिका का ही बड़ा नुकसान कर लिया है? एक्‍सपर्ट्स से समझें

भारत के एनएसए अजीत डोभाल का रूस दौरा, चीन में होने वाले SCO समिट में पीएम मोदी को आमंत्रण, पुतिन का आगामी भारत दौरा जैसी हाल की गतिविधियों को विशेषज्ञ कूटनीतिक कदम मानकर चल रहे हैं, जिनसे अमेरिका को दिक्‍कत हो सकती है.

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  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर भारी टैरिफ लगाए हैं, जिससे भारत और अमेरिका के संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं.
  • विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की नीति भारत को रूस और चीन के करीब ले जा सकती है, जिससे अमेरिका को नुकसान होगा.
  • रूस और चीन ने भी ट्रंप की नीतियों की कड़ी आलोचना की है, जबकि भारत ने इस कदम को अनुचित करार दिया है.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने के फैसले से अमेरिका में ही उनकी नीतियों पर ही गंभीर सवाल उठने लगे हैं. विशेषज्ञों (जिनमें पूर्व सुरक्षा सलाहकार भी शामिल हैं) का मानना है कि ट्रंप के इस कदम से न केवल भारत 'खफा' है, बल्कि अमेरिका के लिए भी भारी नुकसानदेह साबित हो सकता है. ट्रंप के इस कदम को रूस को चोट पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इसका उल्टा असर हो सकता है, जिससे भारत रूस और चीन के और करीब जा सकता है.

भारत के एनएसए अजीत डोभाल का रूस दौरा, चीन में होने वाले SCO समिट में पीएम मोदी को आमंत्रण, पुतिन का आगामी भारत दौरा जैसी हाल की गतिविधियों को विशेषज्ञ कूटनीतिक कदम मानकर चल रहे हैं, जिनसे अमेरिका को दिक्‍कत हो सकती है. कई एक्‍सपर्ट ये भी मानते हैं कि अमेरिका के बरक्‍स भारत, रूस और चीन एक साथ आ जाएं तो 'अंकल सैम' के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है.

'भारत पर टैरिफ लगा ट्रंप खुद को ही खत्‍म कर रहे'

जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और अर्थशास्त्री स्टीव हैंके ने ट्रंप के टैरिफ फैसलों को 'पूरी तरह से बकवास' बताया. उन्होंने कहा कि ट्रंप खुद को ही खत्म कर रहे हैं और भारत को धैर्य रखना चाहिए.

हैंके ने कहा, 'नेपोलियन की सलाह का पालन करना चाहिए, उन्होंने कहा था कि दुश्मन जब खुद को खत्म कर रहा हो तो उसके रास्ते में कभी दखल न दें.'

उनका मानना है कि ट्रंप की 'ताश के पत्तों जैसी आर्थिक नीतियां' जल्द ही ढह जाएंगी. हैंके ने यह भी कहा कि अमेरिका में व्यापार घाटा बहुत ज्यादा है, क्योंकि अमेरिकियों का खर्च उनके सकल राष्ट्रीय उत्पाद से कहीं अधिक है, इसलिए ट्रंप की टैरिफ की नीति पूरी तरह से गलत है.

अमेरिका के लिए क्‍या 'भस्‍मासुर' साबित होंगे ट्रंप?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी ट्रंप की नीतियों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि भारत पर टैरिफ लगाने का मकसद भले ही रूस को नुकसान पहुंचाना हो, लेकिन ये भारत को रूस और चीन के करीब ला सकता है.

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बोल्टन ने कहा कि चीन के प्रति नरमी और भारत पर सख्त टैरिफ की नीति दशकों की अमेरिकी कोशिशों को खतरे में डाल सकती है, जिनका उद्देश्य भारत को रूस और चीन से दूर लाना था.

बोल्टन ने 'द हिल' में अपने एक लेख में लिखा कि चीन को उसी रूसी तेल खरीद के लिए छूट देना, जिसके लिए भारत पर टैरिफ लगाया गया, 'एक बहुत बड़ी गलती और अमेरिका के लिए पूरी तरह से प्रति-उत्पादक' है.

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उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की ये नीति दोस्तों और दुश्मनों, दोनों पर टैरिफ लगाकर अमेरिका के प्रति विश्वास को कम कर रही है. उनका मानना है कि इस कदम से अमेरिका को बहुत कम आर्थिक लाभ होगा, जबकि विश्वास में बड़ी कमी आ सकती है.

चीन और रूस ने भी उठाए अमेरिका पर सवाल

ट्रंप की नीतियों की आलोचना केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है. रूस और चीन ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भारत पर टैरिफ लगाने से पहले कहा था, 'हमें कई बयान सुनने को मिल रहे हैं जो वास्तव में धमकियां हैं, और देशों को रूस के साथ व्यापार संबंध तोड़ने के लिए मजबूर करने के प्रयास हैं. हम ऐसे बयानों को कानूनी नहीं मानते हैं.'

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वहीं, दूसरी ओर चीन के राजदूत जू फीहोंग ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा, 'बदमाश को एक इंच दो, वह एक मील ले लेगा.' उन्होंने इस तरह की नीतियों को अवैध और अस्थिर बताया.

ट्रंप का अड़ियल रवैया और भारत का कड़ा रुख

भारत ने अमेरिका के इस कदम को 'अनुचित और अन्यायपूर्ण' बताया है और इसकी कड़ी निंदा की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी आर्थिक दबाव के आगे नहीं झुकेगा. इस बीच, ट्रंप ने कहा है कि जब तक टैरिफ विवाद हल नहीं हो जाता, तब तक भारत के साथ कोई व्यापार वार्ता नहीं होगी. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में टैरिफ का बचाव करते हुए दावा किया कि इससे अमेरिकी शेयर बाजार और इकोनॉमी को फायदा हो रहा है. हालांकि अमेरिकी अर्थशास्त्री और पूर्व अधिकारी ही उनकी नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं.

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