- ईरान और इजरायल के बीच तेल और गैस क्षेत्रों पर हो रहे लगातार हमलों से खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा संकट गहरा गया है
- कतर के रास लाफान एलएनजी संयंत्र पर ईरान के हमलों से भारी नुकसान हुआ और उत्पादन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा
- इन संघर्षों के कारण वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे भारत सहित कई देश प्रभावित हो रहे हैं
ईरान-अमेरिका-इजरायल की जंग ने तेल और गैस की किल्लत पैदा कर दी है. कई देश इसके कारण सामान्य कामकाज भी नहीं कर पा रहे हैं. भारत इस संकट से बचने की पूरी कोशिश कर रहा है, मगर जो हालात हैं, उसमें दुनिया पर संकट बढ़ता जा रहा है. ऐसे में भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान ने कतर पर दोबारा हमला किया तो अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्र को पूरी तरह से नष्ट कर देगा. ईरान के कतर पर मिसाइल हमले के बाद ट्रंप ने बुधवार रात सोशल मीडिया पर ईरान के साउथ पार्स प्राकृतिक गैस क्षेत्र को लेकर यह धमकी दी. ईरान का यह हमला बुधवार को ही इजरायल की तरफ से साउथ पार्स क्षेत्र पर किए गए हमले के जवाब में था. ये पहला हमला नहीं था, बल्कि दोनों पक्षों की तरफ से अब तक कई तेल और गैस के भंडारों पर हमले किए गए हैं. जानिए कहां-कहां अब तक हुए हमले-
कतर का रास लाफान (Ras Laffan)
कतर में स्थित रास लाफान दुनिया का सबसे बड़ा द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) केंद्र है. कतर एनर्जी नामक सरकारी कंपनी ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान ने इस पर बार-बार हमले किए हैं और लगातार हमलों की वजह से इसे काफी नुकसान पहुंचा है. गुरुवार तड़के, कतर एनर्जी ने केंद्र में स्थित कई एलएनजी संयंत्रों में आग लगने और भारी नुकसान की सूचना दी. बाद में गृह मंत्रालय ने कहा कि आग पर काबू पा लिया गया है. यह घटना बुधवार को ईरान की तरफ से रस लाफान औद्योगिक शहर पर हुए हमले के बाद हुई, जिसमें गैस-से-तरल पदार्थ संयंत्र को पहले ही काफी नुकसान पहुंच चुका है.
कतर दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार को ईरान के साथ साझा करता है. कतर एनर्जी का अनुमान है कि खाड़ी देश के हिस्से में दुनिया के ज्ञात प्राकृतिक गैस भंडार का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है. हाल के वर्षों में, कतर ने फ्रांस की टोटल, ब्रिटेन की शेल, भारत की पेट्रोनेट, चीन की सिनोपेक और इटली की एनी सहित कई कंपनियों के साथ दीर्घकालिक एलएनजी समझौते किए हैं. मार्च की शुरुआत में, ईरानी हमलों के कारण कतर एनर्जी को एलएनजी उत्पादन रोकना पड़ा और अप्रत्याशित स्थिति (फोर्स मेज्योर) घोषित करना पड़ा.
ईरान का साउथ पार्स (South Pars)
इससे एक दिन पहले बुधवार को ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला हुआ. साउथ पार्स/नॉर्थ डोम विशाल गैस क्षेत्र दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात गैस भंडार है और ईरान और कतर के बीच साझा है. ईरान की घरेलू प्राकृतिक गैस का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा इस क्षेत्र के उसके हिस्से से आता है, जिसे वह साउथ पार्स कहता है.
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बताया कि इजरायल के हमले के कारण साउथ पार्स में आग लग गई. इस हमले की ईरान के खाड़ी वाले पड़ोसी देशों कतर और संयुक्त अरब अमीरात ने निंदा भी की. हालांकि इन देशों के ऊर्जा संयंत्रों पर भी ईरान की तरफ से बार-बार हमले किए गए हैं.
ईरान का खारग (Kharg)
ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित खारग द्वीप, देश के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल के निर्यात का केंद्र है. शनिवार को अमेरिकी हमलों में यह द्वीप प्रभावित हुआ, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने बाद में कहा कि निर्यात सामान्य रूप से जारी है और कोई हताहत नहीं हुआ है.
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इससे पहले ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करना जारी रखता है, जो इस क्षेत्र से ऊर्जा और अन्य निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, तो वह द्वीप के तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएंगे. ईरान ने जलडमरूमध्य से तेल के सभी निर्यात को रोकने का संकल्प लिया है और संकरे मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों को निशाना बनाया है, जिससे इस मार्ग पर निर्भर निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
संयुक्त अरब अमीरात का रुवैस रिफाइनरी (Ruwais Refinery)
सरकारी स्वामित्व वाली ऑपरेटर एडनोक के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित रुवैस तेल रिफाइनरी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी एकल-स्थल रिफाइनरी है. एएफपी को एक सूत्र ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में औद्योगिक परिसर पर ड्रोन हमले के बाद एहतियात के तौर पर वहां परिचालन रोक दिया गया था. सूत्र ने यह नहीं बताया कि रिफाइनरी पर हमला हुआ था या नहीं. एडनॉक ने इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की.
सऊदी अरब का रस तनुरा (Ras Tanura)
सऊदी अरब के पूर्वी खाड़ी तट पर स्थित रस तनुरा संयंत्र पूरे मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है और यह सऊदी अरब के ऊर्जा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन 550,000 बैरल है. ईरान द्वारा इस पर बार-बार हमले किए गए हैं, जिनमें संघर्ष की शुरुआत में हुआ एक ड्रोन हमला भी शामिल है, जिसके कारण आग लग गई और रिफाइनरी को आंशिक रूप से बंद करना पड़ा.
ब्लूमबर्ग ने बुधवार को एक अज्ञात सूत्र के हवाले से बताया कि संयंत्र में परिचालन फिर से शुरू हो गया है. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, खाड़ी देशों में तेल और तेल उत्पादों का उत्पादन पिछले वर्ष (ओमान को छोड़कर) 30 मिलियन बैरल प्रति दिन से घटकर वर्तमान में 20 मिलियन बैरल रह गया है. रस तानूरा रिफाइनरी का संचालन करने वाली अरामको के अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि युद्ध का तेल बाजारों पर "विनाशकारी परिणाम" हो सकता है.
दुनिया भर में बढ़ रही है चिंता
इन तेल और गैस भंडारों पर हमले ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है. कारण दुनिया को खाड़ी के देशों से ही तेल और गैस की सप्लाई होती है. ईरान पर हमले हो रहे हैं और ईरान बाकी खाड़ी देशों पर हमले कर रहा है. होर्मुज पहले से ही चोक है. इसके अलावा रूस पर भी बैन सिर्फ समुद्र में खड़े उसके जहाजों से हटा है. ऐसे में तेल और गैस की सप्लाई के लिए यूरोप से लेकर एशिया तक चिंतित है. भारत का ही हाल जान लीजिए...
इन हमलों के कारण बृहस्पतिवार को तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई. ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के शिखर पर पहुंच गई. जाहिर है दुनिया के अन्य देशों की चिंता बढ़ रही है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है. भारत प्रतिदिन औसतन 50 से 55 लाख बैरल (2026 के आंकड़ों के अनुसार) आयात करता है.
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. भारत के कच्चे तेल का अधिकांश आयात पश्चिम एशिया इराक, सऊदी अरब, यूएई और अब रूस से होता है. पहले ईरान से भी तेल आयात होता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसे रोक दिया गया. इसी तरह भारत अपनी LPG खपत का लगभग 60% आयात करता है. जाहिर है, तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत सहित दुनिया भर में हर चीज महंगी हो जाएगी. बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देश तो इसके कारण बेहद परेशान हैं.
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