बंगाल में बीजेपी की बंपर जीत की बांग्लादेश तक गूंज, सरहद पार हलचल और बयानों का दौर

बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत और खुद ममता बनर्जी की करारी हार ने पड़ोसी बांग्लादेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करारी हार ने भारत ही नहीं, पड़ोसी बांग्लादेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है. ढाका के सत्ता के गलियारों से लेकर सोशल मीडिया मंच पर इन नतीजे को लेकर चिंता और उम्मीदों का मिला-जुला माहौल है. सोशल मीडिया पर इसे मुस्लिम राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने प्रतिक्रिया में कहा कि भारत को लेकर हमारी विदेश नीति पर बंगाल के चुनाव नतीजों का कोई असर नहीं पड़ेगा. हमारी 'बांग्लादेश फर्स्ट' की नीति है. दूसरे देश में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार हो, उससे हमारी विदेश नीति नहीं बदलती है. शमा ने पत्रकारों से बंगाल के चुनाव को लेकर कहा कि पहली बात तो यह कि इससे बीएनपी का कोई लेना-देना नहीं है. चुनाव भारत में हो रहे हैं, यह भारत का आंतरिक मामला है और उसके लोकतंत्र से जुड़ा है. हमारा मानना है कि हमारे देश में लोकतंत्र होना चाहिए. साथ ही भारत समेत सभी पड़ोसी देशों में भी लोकतंत्र मजबूत होना चाहिए. 

देखें- 11 चुनाव, 7 में जीत, दिल्ली 27 साल बाद तो बंगाल पहली बार फतेह... 2024 के बाद 'Modi 2.0' का जलवा

बांग्लादेश में सरकार भले ही असर न पड़ने की बात कह रही हो, लेकिन ये छिपी बात नहीं है कि बंगाल में बीजेपी की जीत को लेकर बांग्लादेशी नेताओं और विशेषज्ञों में काफी चिंता है. हाल में बांग्लादेश की नेशनल सिटीजन पार्टी के सदस्य सचिव अख्तर हुसैन ने संसद में चिंता जताते हुए कहा था कि बीजेपी की जीत से बांग्लादेश में बड़ा संकट पैदा हो सकता है. वो सभी कंगलू लोगों को बांग्लादेश में धकेल देंगे, इससे हमारे लिए एक और बड़ा शरणार्थी संकट खड़ा हो सकता है. हम इसे लेकर चिंतित हैं. बता दें कि कंगलू एक अपमानजनक शब्द है, जिसका प्रयोग बांग्लादेश से आए अवैध मुस्लिम घुसपैठियों के लिए किया जाता रहा है. 

Advertisement

भारत खासकर बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा काफी गरम रहा है. बीजेपी ममता बनर्जी सरकार पर अपने राजनीतिक हित साधने के लिए अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने के आरोप लगाती रही है. चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के गहन रिवीजन (SIR) के दौरान करीब 90 लाख लोगों के नाम काट दिए गए हैं. इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग होने की संभावना है, जिन्होंने अवैध रूप से आकर बंगाल की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा लिए थे. बांग्लादेश से सटे कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जैसे जिलों में बड़ी संख्या में वोटरों के नामों पर कैंची चली है. 

देखें- ये हिंदुत्व की जीत... ममता बनर्जी को मात देकर सुवेंदु अधिकारी ने बताया कैसे पलटी बाजी

बांग्लादेश मीडिया में बंगाल चुनाव छाए रहे. अधिकतर मीडिया वेबसाइटों की पहली खबर बंगाल चुनाव में बीजेपी की जीत नजर आई. डेली स्टार ने जानकारों के हवाले से अपने एनालिसिस में इस जीत को बंगाल के लोगों के ममता सरकार से नाखुशी से जोड़ा. कहा कि  वेलफेयर उपायों की कमी, बढ़ती बेरोजगारी, उद्योगों की कमी को लेकर फ्रस्टेशन जैसे कई मुद्दों को लेकर लोगों का मोहभंग हुआ. मतदाता विकास, रोजगार, प्रशासनिक ईमानदारी और राजनीतिक विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर अधिक मुखर और जागरूक हो चुके हैं. लेकिन ये भी कहा कि बंगाल का यह ऐतिहासिक बदलाव केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं है बल्कि सरकारों को एक कड़ा संदेश है कि अब केवल पुरानी उपलब्धियों के दम पर सत्ता बरकरार नहीं रखी जा सकती.

Advertisement

उधर ढाका में भारत के निवर्तमान उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने सोमवार को विदेश मंत्री कहलिलुर रहमान से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करते हुए भविष्य में दोनों देशों के बीच संबंधों को और बेहतर बनाने की उम्मीद जतायी. सरकारी मीडिया के अनुसार, दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत करने और आगे बढ़ाने पर भरोसा जताया. वर्मा ने बांग्लादेश की जनता और सरकार के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई ताकि दोनों देशों के विकास की प्राथमिकताओं और आपसी हित तथा लाभ के आधार पर सभी क्षेत्रों में जन केंद्रित सहयोग को और मजबूत किया जा सके. 

देखें- बंगाल में भगवा लहर, ममता बनर्जी साफ; बीजेपी की जीत के 10 फैक्टर

Featured Video Of The Day
Bengal Election Results 2026: बंगाल-असम जीत पर क्या बोले PM Modi? Mamata Banerjee | BJP | TMC
Topics mentioned in this article