पब्लिक वोटिंग, सरकार का दखल…जानें कैसे चुने जाते हैं अमेरिका में जज, जिन्होंने ट्रंप की नाक में कर रखा है दम

अमेरिका में भी भारत ती तरह ही सुप्रीम कोर्ट और राज्यों के हाई कोर्ट का सिस्टम है. लेकिन अमेरिका के जजों की नियुक्ति का तरीका काफी अलग और अनोखा है.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को छह-तीन के बहुमत से गैर-कानूनी घोषित किया
  • अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट के अलावा राज्य स्तर पर भी अदालतें होती हैं
  • फेडरल जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा नामांकन और सीनेट की मंजूरी से होती है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति को एक बड़ा झटका दिया. कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को गैर-कानूनी करार दिया है. इस बीच दुनियाभर में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की चर्चा तेज हो गई. अमेरिका में भी सुप्रीम कोर्ट के अलावा राज्यों में अलग-अलग कोर्ट होते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि अमेरिका में कौन-कौन सी अदालतें होती हैं और इनके जजों का चयन कैसे होता है. इसके अलावा भारत की न्यायिक व्यवस्था से ये कैसे और कितना अलग है.

भारत की तरह ही सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का सिस्टम

अमेरिका में जजों के चुनाव या नियुक्ति की प्रक्रिया भारत या अन्य देशों से काफी अलग है. हालांकि वहां भी भारत की तरह दो स्तर के प्रमुख कोर्ट होते हैं. सबसे बड़ी अदालत वहां की सुप्रीम कोर्ट होती है, जिसे फेडरल कोर्ट कहा जाता है. वहीं राज्य स्तर पर भी अदालतें होती हैं. फेडरल कोर्ट के जजों को फेडरल जज और राज्यों के जजों को स्टेट जज कहा जाता है. इसके अलावा निचली अदालतें भी होती हैं, जिन्हें सर्किट कोर्ट या डिस्ट्रिक्ट कोर्ट कहा जाता है.

कैसे होती है फेडरल जजों की नियुक्ति?

अमेरिका के संविधान के अनुच्छेद 2 के अनुसार, सभी फेडरल जजों की नियुक्ति एक खास राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से होती है.

  • राष्ट्रपति द्वारा नामांकन: अमेरिकी संविधान के आर्टिकट 2, सेक्शन 2 के अनुसार, देश के राष्ट्रपति फेडरल जजों को नामित करते हैं. राष्ट्रपति का यह फैसला उम्मीदवार की कानूनी योग्यता, न्यायिक नजरिये और राजनीतिक कारणों पर आधारित हो सकता है.
  • सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी की समीक्षा: राष्ट्रपति द्वारा नाम भेजे जाने के बाद, सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी उस पर सुनवाई करती है. इसमें उम्मीदवार की योग्यता और उनके पिछले फैसलों को लेकर सवाल-जवाब किए जाते हैं, जिसके बाद कमेटी अपनी सिफारिश पूरी सीनेट को भेजती है.
  • सीनेट की मंजूरी: सीनेट में बहस के बाद बहुमत के जरिए उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगाई जाती है. सीनेट की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति उन्हें औपचारिक रूप से नियुक्त करते हैं. इन जजों को केवल महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता है.

कब तक होता है फेडरल जजों का कार्यकाल?

फेडरल जजों का कार्यकाल आजीवन होता है. वे तब तक अपने पद पर बने रहते हैं जब तक वे स्वयं इस्तीफा न दें, रिटायर न हों, या दुर्व्यवहार के कारण सीनेट द्वारा उन पर महाभियोग चलाकर उन्हें हटाया न जाए.

राज्य स्तर पर जजों का कैसे होता है चयन?

अमेरिका के 50 राज्यों के अपने अलग-अलग संविधान और नियम हैं. इसलिए, राज्य के अदालतों और निचली अदालतों में जजों को चुनने के तरीके हर राज्य में अलग होते हैं. मुख्य रूप से जजों के चयन के 5 तरीके अपनाए जाते हैं.

  • पार्टी आधारित चुनाव: इसमें जज राजनीतिक नेताओं की तरह ही चुनाव लड़ते हैं. बैलेट पेपर पर उनके नाम के साथ उनकी राजनीतिक पार्टी (जैसे- रिपब्लिकन या डेमोक्रेट) का नाम भी लिखा होता है और जनता सीधे उन्हें वोट देती है.
  • बिना पार्टी वाले चुनाव: इसमें भी जनता सीधे वोट देकर जज चुनती है, लेकिन बैलेट पेपर पर उम्मीदवार की किसी राजनीतिक पार्टी का उल्लेख नहीं होता है.
  • मैरिट सलेक्शन/ मिसौरी प्लान: अमेरिका के कुछ राज्यों में जजों को वकीलों और नागरिकों की एक कमिटी चुनती है. कमिटी कुछ उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार करके गवर्नर को देती है. गवर्नर उनमें से किसी एक को जज नियुक्त करता है. एक या दो साल के कार्यकाल के बाद, एक रिटेंशन चुनाव होता है, जिसमें जनता केवल 'हां' या 'ना' में वोट देकर यह तय करती है कि उस जज को आगे पद पर रहना चाहिए या नहीं.
  • गवर्नर द्वारा नियुक्ति: जैसे फेडरल कोर्ट में राष्ट्रपति जजों की नियुक्ति करता है ठीक वैसे ही कुछ राज्यों में गर्वनर ही सीधे जजों की नियुक्ति करते हैं. हालांकि, इसके लिए अक्सर राज्य की सीनेट या किसी विशेष परिषद की मंजूरी जरूरी होती है.
  • राज्यों की संसद द्वारा नियुक्ति: अमेरिका के कुछ राज्यों जैसे वर्जीनिया और साउथ कैरोलिना में वहां की विधानसभा (राज्यों की संसद) वोटिंग के जरिए स्टेट जजों को चुनती है. इस प्रोसेस में जनता या गवर्नर की सीधी भूमिका नहीं होता.

भारत से कैसे अलग है अमेरिका के जजों की नियुक्ति?

अमेरिका में जजों की नियुक्ति भारत से काफी अलग है. भारत में जहां न्यायपालिका का बोलबाला है, वहीं अमेरिका में कार्यपालिका और विधायिका की भूमिका प्रमुख होती है. भारत में कॉलेजियम सिस्टम है, जिसमें जज ही जजों को चुनते हैं. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और चार सीनियर जजों का कॉलेजियम नाम तय करता है और सरकार को भेजता है. सरकार केवल उन नामों पर मुहर लगाती है. वहीं अमेरिक में राष्ट्रपति फेडरल जजों को नामित करते हैं. इसके बाद संसद का ऊपरी सदन सीनेट में सार्वजनिक सुनवाई होती है और मतदान होता है.

Advertisement

ये भी पढ़ें: भारत पर 18 नहीं अब 10 प्रतिशत टैरिफ ही लगेगा, अमेरिकी राष्ट्रपति के नए आदेश पर तस्वीर हुई साफ

Featured Video Of The Day
Trump का Iran को 10 दिन का Ultimatum Deal नहीं तो मिलिट्री स्ट्राइक | Iran US War Tension | BREAKING
Topics mentioned in this article