क्लाइमेट चेंज के चलते भारत में और तपाने लगी है अधिक तेज लू, आने वाला वक्त होगा और दुखदायी

एट्रिब्यूशन अध्ययन, जो किसी विशेष मौसम घटना पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को निर्धारित करते हैं, उन्हें पूरा होने में महीनों लग सकते हैं. अप्रैल और मई के सभी रिकॉर्ड एकत्र होने पर, यह देखना होगा कि क्या इस साल की हीटवेव 2010 में अनुभव किए गए स्तरों से अधिक है.

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हाल के दिनों में, भारत के कुछ हिस्सों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो गया है.

जलवायु परिवर्तन के कारण भारत और पाकिस्तान में लोगों को भयंकर लू का सामना करना पड़ रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन ने अप्रैल और मई महीने में उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान में चरम तापमान को 100 गुना अधिक बढ़ा दिया है. इसके साथ ही ये संभावना भी बढ़ा गई है कि इस तरह की गर्मी की लहरें सदी के अंत तक अधिक बार आएंगी. बुधवार को प्रकाशित हुए यूके के मेट ऑफिस द्वारा एक एट्रिब्यूशन अध्ययन में ये बात कही गई है.

Bloomberg में छपी अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, अगर क्लाइमेट चेंज के प्रभाव को एकबारी नजरअंदाज करें, जो 2010 का औसत तापमान है, वो हर 312 साल में एक बार पार होते हुए देखा जा सकता है, लेकिन अब क्लाइमेट चेंज के चलते यह तापमान हर 3.1 साल में एक बार देखा जा सकता है. वहीं यह सदी खत्म होते-होते हर 1.5 साल में तापमान की यह औसत सीमा पार हो सकती है. मौसम कार्यालय के अनुसार, भारत और पाकिस्तान की लू भी अपनी अवधि में असाधारण है. मार्च में अत्यधिक उच्च तापमान शुरू हुआ और इस सप्ताह फिर से गर्मी बढ़ने की संभावना है.

एट्रिब्यूशन अध्ययन, जो किसी विशेष मौसम घटना पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को निर्धारित करते हैं, उन्हें पूरा होने में महीनों लग सकते हैं. क्योंकि प्रत्येक अध्ययन की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की जानी है. प्रक्रिया को तेज करने के लिए, मौसम कार्यालय ने कहा कि ये एक सहकर्मी-समीक्षा पद्धति के साथ आया है. जिसे होने वाली हर बड़ी घटना पर फिर से लागू किया जा सकता है.

वैज्ञानिकों को महीने के अंत तक इंतजार करना होगा. अप्रैल और मई के सभी रिकॉर्ड एकत्र होने पर, यह देखना होगा कि क्या इस साल की हीटवेव 2010 में अनुभव किए गए स्तरों से अधिक है.

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