- अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ, लेकिन इजरायल लेबनान पर लगातार हमले कर रहा है
- इजरायली फाइटर जेट्स ने 10 मिनट में सौ ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिससे 250 से अधिक लोगों की मौत हुई है
- इजरायल का कहना है कि लेबनान सीजफायर का हिस्सा नहीं है, जबकि पाकिस्तान और फ्रांस इसे समझौते में शामिल मानते हैं
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हो गया है, लेकिन इसके बाद भी इजरायल लगातार लेबनान पर हमले कर रहा है. लेबनान में शांति के बजाय तबाही का खौफनाक मंजर देखने को मिल रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि शनिवार को जब दोनों पक्ष अमेरिका और ईरान बातचीत की टेबल पर बैठेंगे, तो क्या लेबनान के मुद्दे को इस बातचीत से अलग रखा जा सकता है? फिलहाल लेबनान में हालात बेहद डरावने हैं. एनडीटीवी की टीम लेबनान पहुंची, जहां भारी बमबारी से कई मंजिला अपार्टमेंट पलक झपकते ही मलबे में तब्दील हो गए हैं.
10 मिनट में 100 मिसाइलें
एनडीटीवी की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने करीब 50 फाइटर जेट्स के जरिए महज 10 मिनट के अंदर 100 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागीं. इन भीषण हमलों में कम से कम 254 लोगों की जान जा चुकी है और 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. एक साथ इतने घायलों के पहुंचने से अस्पताल पूरी तरह से भर गए हैं और डॉक्टरों के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो गया है.
इजरायल का गुस्सा या सीजफायर तोड़ने की साजिश?
सवाल यह है कि आखिर सीजफायर लागू होते ही इतने बड़े हमले क्यों हुए? कई लोगों का मानना है कि इजरायल जानबूझकर इन हमलों के जरिए सीजफायर को खत्म करना चाहता है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर की घोषणा से पहले इजरायल को भरोसे में नहीं लिया था और ऐसा माना जा रहा है कि इजरायल उसी बात का गुस्सा लेबनान पर उतार रहा है.
लेबनान सीजफायर में शामिल है या नहीं?
इस बमबारी के पीछे सबसे बड़ा विवाद यह है कि लेबनान सीजफायर का हिस्सा है या नहीं. इजरायल का कहना है कि लेबनान इस समझौते में शामिल नहीं है और हमले जारी रहेंगे. मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान का दावा है कि लेबनान सीजफायर का हिस्सा है. वहीं अमेरिका का कहना है कि बातों को समझने में कुछ गलतफहमी हुई है. इधर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हमलों की निंदा करते हुए लेबनान को सीजफायर में शामिल करने की बात कही है.
12 लाख लोग बेघर, टूट गए युद्ध के सारे उसूल
इस जंग में अब कोई उसूल नहीं बचा है. इजरायल का दावा है कि वह हिजबुल्लाह को निशाना बना रहा है, लेकिन हमले घनी आबादी वाले इलाकों, एंबुलेंस और पत्रकारों पर हो रहे हैं. बम बेल्जियम एंबेसी से महज 100 मीटर की दूरी पर भी गिरे हैं. देश की करीब एक चौथाई आबादी यानी 12 लाख लोग बेघर हो चुके हैं. तबाही और बेबसी के इस मंजर के बीच लेबनान सरकार ने राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है.
यह भी पढ़ें: लेबनान लहूलुहान, क्योंकि बीच में था पाकिस्तान? शरीफ के रोल पर क्यों सवाल उठा रहे अमेरिका-इजरायल और ईरान
अब आगे क्या? पाकिस्तान में होने वाली वार्ता पर टिकी नजरें
ईरान ने साफ संदेश दिया है कि जब तक लेबनान में जंग जारी रहेगी, शांति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती. अब अगले कुछ घंटे बहुत अहम हैं, क्योंकि पाकिस्तान में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत होने वाली है. इस बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि लेबनान पर इजरायली हमलों की सबसे बड़ी लहर देखी जा रही है, जिनमें बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है और किसी भी युद्ध में बच्चे कभी टारगेट नहीं हो सकते.
यह भी पढ़ें: अमेरिका ने ईरान पर किया ऐतिहासिक जीत का दावा, लेकिन क्या ये है पूरी सच्चाई? जानें इस सीजफायर के 5 बड़े सच













