ब्रिटेन, इटली और जापान के साथ छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने में शामिल हो सकता है जर्मनी

शुक्रवार को जब जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइज़ुमी से पूछा गया कि क्या जर्मनी ने GCAP में शामिल होने के बारे में कोई पूछताछ की है, तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन इस मुद्दे पर ग्रुप की सोच के बारे में जरूर बताया.

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जीकैप प्रोजेक्ट 2035 तक जमीन पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है. (फोटो क्रेडिट-एनडीटीवी)
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  • जर्मनी ने ब्रिटेन, जापान और इटली के ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम में शामिल होने के संकेत दिए हैं
  • फ्रांस के साथ फाइटर जेट प्रोजेक्ट विफल होने के बाद जर्मनी ने यूरोपीय सहयोग को प्राथमिकता दी है
  • GCAP प्रोग्राम में कनाडा ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हुआ है और सऊदी अरब की भी रुचि है

जर्मनी ने संकेत दिया है कि अगली पीढ़ी के फाइटर जेट को विकसित करने के लिए वो जापान, ब्रिटेन और इटली के संयुक्त प्रोजेक्ट में शामिल हो सकता है. यह बात तब सामने आई जब गुरुवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से कहा कि ब्रिटेन 'ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम' (GCAP) में जर्मनी की भागीदारी को लेकर सकारात्मक है. 

फ्रांस के साथ नहीं बन पाई बात

जर्मन सरकार के पहले डिप्टी प्रवक्ता स्टीफन मेयर ने शुक्रवार को एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश ने बर्नहम के नजरिए का सकारात्मक रूप से स्वागत किया है. इस बीच, मेयर ने बताया कि जर्मनी अगली पीढ़ी के फाइटर जेट के विकास से जुड़ी समस्या का समाधान निकालने के लिए यूरोपीय तरीका अपनाना चाहता है. इससे संकेत मिलता है कि देश अलग-अलग चर्चाओं के दौरान अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की योजना बना रहा है. ऐसी अटकलें बढ़ रही हैं कि जून में फ्रांस और जर्मनी के बीच फाइटर जेट बनाने का एक प्रोजेक्ट फेल होने के बाद, GCAP के संस्थापक देश जर्मनी के लिए अपने दरवाजे खोल सकते हैं.

जर्मनी के ब्रिटेन-इटली से अच्छे संबंध

बर्नहम ने कहा, "हम आने वाले समय में अपने अन्य सहयोगियों इटली और जापान के साथ मिलकर इस विचार को आगे बढ़ाना चाहते हैं." GCAP को अलग-अलग स्तर की भागीदारी की अनुमति देने के लिए बनाया गया था. जुलाई में इसका पहली बार विस्तार हुआ, जब कनाडा एक ऑब्जर्वर के तौर पर इसमें शामिल हुआ. इससे भविष्य में और गहरी भागीदारी का रास्ता खुल सकता है. लंबे समय से सऊदी अरब को भी इसमें शामिल होने के इच्छुक देश के तौर पर देखा जा रहा है. कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स जर्मनी को एक उपयुक्त सहयोगी मानते हैं, क्योंकि उसका मिलिट्री बजट बढ़ रहा है और वह पहले से ही यूके और इटली के साथ मिलकर यूरोफाइटर टाइफून पर काम कर रहा है.

जापान को थोड़ा सा परहेज

ब्रिटेन के नज़रिए से देखें तो, ऐसे समय में जब उसके मिलिट्री बजट पर दबाव है, किसी और देश को शामिल करने से लागत का बोझ बांटने में मदद मिलेगी, लेकिन जापान को इसके लिए मनाना पड़ सकता है. इटली ने भी पहले कहा है कि वह लागत बांटने में मदद के लिए नए देशों के शामिल होने का स्वागत करेगा. जापान खास तौर पर इस प्रोग्राम के लिए 2035 के लक्ष्य पर ध्यान दे रहा है, क्योंकि चीन से सुरक्षा का खतरा है और उसे अगले दशक के मध्य में अपने F-2 फाइटर जेट्स को रिटायर करना शुरू करना है. जापान के कुछ अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नए पार्टनर को शामिल करने से काम में देरी हो सकती है. GCAP को BAE सिस्टम्स, लियोनार्डो और मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं.

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शुक्रवार को जब जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइज़ुमी से पूछा गया कि क्या जर्मनी ने GCAP में शामिल होने के बारे में कोई पूछताछ की है, तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन इस मुद्दे पर ग्रुप की सोच के बारे में जरूर बताया. कोइज़ुमी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "शुरुआत में, GCAP को जापान, यूनाइटेड किंगडम और इटली के साथ-साथ सहयोगी और पार्टनर देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के मकसद से विकसित किया गया था. तीसरे देशों के साथ सहयोग के मामले में, हम ब्रिटेन और इटली के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं ताकि यह पक्का किया जा सके कि GCAP और भी बेहतर प्रोग्राम बने."

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