नेपाल के बाद फ्रांस में भी सड़कों पर उतरे लोग, जगह-जगह प्रदर्शन, 200 गिरफ्तारी...अब आगे क्या होगा

‘ब्लॉक एवरीथिंग’ आंदोलन फिलहाल भले ही शुरुआती दौर में हो लेकिन ये पुराने ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से मिलती-जुलती जैसा ही लग रहा है. जिसने ईंधन कर वृद्धि के खिलाफ शुरू होकर आर्थिक असमानता के मुद्दों को उठाया था. उसी की तर्ज पर चलते हुए अब एक बार फिर फ्रांस की सड़कों पर असंतोष की लहर है, जो सत्ता के गलियारों तक पहुंच रही है.

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  • फ्रांस में ब्लॉक एवरीथिंग समूह के नेतृत्व में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं
  • पेरिस समेत कई प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम किया
  • गृह मंत्री के अनुसार प्रदर्शन के पहले कुछ घंटों में लगभग 200 को गिरफ्तार किया
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पेरिस:

एक तरफ नेपाल में जेन जी के प्रदर्शन के बाद राजनीति संकट गहरा गया है, लोग सड़कों पर उतर आए हैं. इस बीच यूरोपियन मुल्क फ्रांस में भी आंदोलन ने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है, दरअसल फ्रांस में ‘ब्लॉक एवरीथिंग' नामक विरोध प्रदर्शन ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार को नई चुनौती दे दी है. आज पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम जाम कर दिया आगजनी की, नौबत ये आन पड़ी कि लोगों को पीछे हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़ लेकिन इसके बावजूद लोग डंटे रहे. 

फ्रांस में क्यों शुरू हुआ प्रदर्शन

फ्रांस में इस वक्त कैसे हालात है इसका अंदाजा इससे लगा लीजिए कि गृह मंत्री ब्रूनो रिटेलो ने बताया कि राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के पहले कुछ घंटों में करीब 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पश्चिमी शहर रेन में एक बस को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि दक्षिण-पश्चिम में एक बिजली लाइन को नुकसान पहुंचने से ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं. फ्रेंच लोगों का यह आंदोलन, जो गर्मियों में सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड चैट्स से शुरू हुआ, अब एक बड़े जन असंतोष का रूप ले चुका है. इसकी कोई साफ वजह नहीं है, लेकिन इसके पीछे बजट में कटौती, सामाजिक असमानता और सरकार की नीतियों के खिलाफ गहरी नाराजगी साफ दिख रही है.

इमैनुअल मैक्रों के लिए संकट की घड़ी

नेपाल में Gen Z आंदोलन ने युवाओं को सड़कों पर ला दिया, जहां उन्होंने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ आवाज़ बुलंद की. फ्रांस में भी आंदोलन का इसी से मिलता-जुलता प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. जहां फ्रांसीसी प्रदर्शनकारी बेल्टवे को जाम कर रहे हैं, पुलिस पर चीजें फेंक रहे हैं और ट्रैफिक को भी रोक रहे हैं. फ्रांस में यह संकट ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बेयरू संसद में विश्वास मत हार चुके हैं और राष्ट्रपति मैक्रों ने नए प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू को नियुक्त किया है. लेकिन उनके लिए यह नियुक्ति एक ‘बेपटिज्म ऑफ फायर' साबित हो रही है.

फ्रांस के नए पीएम ने काम संभाला

फ्रांस के नए पीएम सेबास्टियन लेकोर्नू ने अपना कार्यभार संभाल लिया है, लेकिन उनके पहले ही दिन देशभर में विरोध प्रदर्शनों हो रहे हैं. इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई एक वामपंथी समूह "ब्लॉक एवरीथिंग" कर रहा है, जो राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश को स्वर देने के लिए मुखर हो रहा है. वहीं नए फ्रांसीसी पीएम लेकोर्नू, जो पिछले तीन वर्षों से रक्षा मंत्री रहे हैं, उन्हें राष्ट्रपति मैक्रों का करीबी माना जाता है और अब उन्हें फ्रांस की राजनीतिक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री बनाया गया है.

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