- दुनिया के 27 देशों में फैले 91 हजार से अधिक तिब्बती मतदाताओं ने तिब्बती चुनाव के लिए पंजीकरण कराया है
- चुनाव का उद्देश्य राजनीतिक नेतृत्व चुनना नहीं, बल्कि तिब्बत की आज़ादी की लड़ाई की अगुवाई करना है
- तिब्बती चुनाव आयोग ने 80 से अधिक क्षेत्रीय आयुक्त, 309 मतदान केंद्र और 1800 कर्मचारी तैनात किए हैं
निर्वासन में रह रहे तिब्बती समुदाय में 1 फरवरी को होने वाले सिकीओंग और तिब्बती संसद‑इन‑एक्जाइल के सदस्यों के आम चुनाव के पहले चरण को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. दुनिया के 27 देशों में फैले 91 हजार से ज्यादा तिब्बती मतदाताओं ने इस चुनाव के लिए पंजीकरण कराया है. तिब्बती चुनाव आयोग ने इसे ‘यूनिक चुनाव' करार दिया है. तिब्बती चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त लोबसांग येशी ने एएनआई से बातचीत में कहा कि यह चुनाव कई मायनों में अनोखा है.
दलाई लामा के वोट डालने की संभावना
उन्होंने कहा कि यह चुनाव 27 अलग‑अलग देशों में एक साथ कराया जा रहा है और इसका उद्देश्य किसी देश के शासन के लिए राजनीतिक नेतृत्व चुनना नहीं, बल्कि ऐसे प्रतिनिधि चुनना है जो तिब्बत की आज़ादी की लड़ाई की अगुवाई कर सकें. इस चुनाव में तिब्बती धर्मगुरु 14वें दलाई लामा के भी मतदान करने की संभावना जताई जा रही है. इस पर लोबसांग येशी ने बताया कि फिलहाल दलाई लामा दक्षिण भारत में हैं. चुनाव आयोग ने उनके लिए विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं, जिससे उनके वोट डालने की प्रबल संभावना है.
चुनाव के लिए क्या तैयारियां
चुनाव आयोग के मुताबिक, इस चुनाव के संचालन के लिए 80 से अधिक क्षेत्रीय चुनाव आयुक्त तैनात किए गए हैं. इसके अलावा 309 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां करीब 1,800 कर्मचारी, चुनाव आयोग के सदस्य, पर्यवेक्षक और स्वयंसेवक चुनाव प्रक्रिया में शामिल हैं. यह प्रारंभिक चुनाव है, इसलिए अभी उम्मीदवारों की पूरी संख्या तय नहीं है. चुनाव का अंतिम चरण 26 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा.
तिब्बतियों को अपनी व्यवस्था पर गर्व
निर्वासित तिब्बती टेम्पा ग्यात्सेन ने एएनआई से बातचीत में कहा कि वह इस चुनाव को लेकर बेहद उत्साहित और गर्व महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि निर्वासन में रहने के बावजूद तिब्बती समुदाय दुनिया की सबसे मजबूत लोकतांत्रिक चुनाव प्रणालियों में से एक को अमल में ला रहा है. एक ही दिन में 27 देशों में चुनाव कराए जा रहे हैं, जिसमें तिब्बती लोग अपने नेतृत्व का चुनाव करेंगे. उन्होंने दावा किया कि लोकतंत्र, अधिकारों और स्वतंत्रता के मामले में तिब्बती समुदाय चीन से कहीं आगे है.
चीन को सीधा संदेश, आज़ादी की उम्मीद
एक अन्य निर्वासित तिब्बती थुबतेन ने कहा कि ये चुनाव सीधे तौर पर चीन को एक मजबूत संदेश देते हैं. उन्होंने कहा कि तिब्बत के अंदर रहने वाले लोगों को अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार नहीं है, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बात तो दूर है. ऐसे में भारत में निर्वासन के दौरान नेतृत्व चुनने की यह प्रक्रिया तिब्बत के लोगों के लिए उम्मीद की किरण है. थुबतेन ने कहा कि इन चुनावों के जरिए यह संदेश जाता है कि सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) तिब्बती लोगों की एक वास्तविक और वैध प्रतिनिधि संस्था है—चाहे वे तिब्बत के भीतर हों या बाहर.
दलाई लामा और CTA के साथ जनता का विश्वास
उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजों का तिब्बत के अंदर रहने वाले लोग भी स्वागत करेंगे और निर्वासन में चुना गया नेतृत्व वहां के लोगों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा. यह चीनी सरकार के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि दमन के बावजूद तिब्बती लोगों का दिल और दिमाग दलाई लामा और सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन के साथ है.













