जिस ब्रिटेन ने भारत में खींच दी थी सरहद की लाइन, अब खुद के देश की ज्योग्राफी का अता-पता नहीं

ब्रिटेन ने किंग चार्ल्स III के नेतृत्व में इंग्लैंड कोस्ट पाथ का उद्घाटन किया, जो दुनिया का सबसे लंबा प्रबंधित तटीय मार्ग होगा. लेकिन इसकी सटीक लंबाई मापा ही नहीं जा सका है.

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  • ब्रिटेन ने इतिहास में सीमाएं तय कीं, लेकिन आज उसे अपने समुद्री तट की सटीक लंबाई का पता नहीं है
  • ब्रिटेन की तटरेखा की लंबाई के आंकड़ों में हजारों मील का अंतर है, विभिन्न संस्थाओं के अनुसार अलग-अलग माप हैं
  • तटरेखा मापने में कोस्टलाइन पैराडॉक्स नामक वैज्ञानिक समस्या है. ये घुमावदार रास्तों को मापने से होती है
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इतिहास के पन्नों को पलटें तो याद आता है कि कैसे अंग्रेजों ने एक टेबल पर बैठकर नक्शे पर लकीर खींची और भारत के भूगोल को सरहदों में बांट दिया. लेकिन आज वही ब्रिटेन एक अजीबोगरीब पशोपेश में फंसा है. ताज्जुब की बात यह है कि जिस देश ने दुनिया के आधे हिस्से पर राज किया और सीमाएं तय कीं, उसे आज खुद अपने ही देश के समुद्री तट की सटीक लंबाई नहीं पता. हाल ही में किंग चार्ल्स III ने इंग्लैंड के चारों ओर एक नए 'हाइकिंग ट्रेल' (पैदल चलने का रास्ता) का उद्घाटन किया है, लेकिन एक वैज्ञानिक विरोधाभास के कारण कोई भी यह दावे से नहीं कह सकता कि यह तट असल में कितना लंबा है.

पिछले महीने शुरू हुआ 'किंग चार्ल्स III इंग्लैंड कोस्ट पाथ' जब इस साल के अंत तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा, तो यह दुनिया का सबसे लंबा प्रबंधित तटीय मार्ग बन जाएगा.

लगभग 2,689 मील (4,327 किमी) लंबा यह रास्ता कॉर्नवाल की चट्टानों से लेकर नॉर्थम्बरलैंड के रेतीले टीलों तक फैला है. लेकिन पेच यह है कि जहां इंसानों द्वारा बनाए गए इस रास्ते को तो मापा जा सकता है, वहीं कुदरती तटरेखा को मापना लगभग नामुमकिन साबित हो रहा है. अलग-अलग संस्थाओं के पास इसके अलग-अलग आंकड़े हैं, जिनमें हजारों मील का अंतर है.

कहीं 7 हजार तो कहीं 12 हजार मील है लंबाई

ब्रिटेन की तटरेखा को लेकर आंकड़े में भारी अंतर है. 'सीआईए वर्ल्ड फैक्टबुक' इसे 7,723 मील (12,429 किमी) बताता है, जबकि 'वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट' के मुताबिक यह 12,251 मील (19,716 किमी) है. यानी दो प्रतिष्ठित संस्थाओं के आंकड़ों में ही 4,500 मील से ज्यादा का फासला है. 

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह समस्या सिर्फ ब्रिटेन तक सीमित नहीं है. अमेरिका के मामले में तो यह अंतर और भी डरावना है. सीआईए इसे 12,380 मील मानता है, जबकि वहां की एक अन्य एजेंसी 'नोआ' (NOAA) के अनुसार यह 95,471 मील है.

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इस विसंगति के पीछे एक वैज्ञानिक कारण है जिसे 'कोस्टलाइन पैराडॉक्स' (तटरेखा विरोधाभास) कहा जाता है. इसकी खोज एक ब्रिटिश शांतिवादी गणितज्ञ लुईस फ्राई रिचर्डसन ने साल 1921 में की थी, जब वे यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि क्या बड़ी सीमाओं वाले देशों के बीच युद्ध की संभावना ज्यादा होती है.

 कोस्टलाइन पैराडॉक्स क्या है?

रिचर्डसन ने गौर किया कि स्पेन और पुर्तगाल अपनी साझा सीमा की लंबाई अलग-अलग बताते थे. उन्होंने महसूस किया कि तटरेखाएं या सीमाएं कभी सीधी नहीं होतीं. जब हम किसी नक्शे को बड़े पैमाने पर मापते हैं, तो हम छोटी-छोटी घुमावदार कड़ियों और खाड़ियों को छोड़ देते हैं. लेकिन जैसे-जैसे मापने वाला पैमाना (Ruler) छोटा होता जाता है, वह तट के हर छोटे मोड़ और नुकीले हिस्से को पकड़ने लगता है. नतीजा यह होता है कि पैमाना जितना छोटा होगा, कुल लंबाई उतनी ही बढ़ती जाएगी.

यही वह विडंबना है जिसने दुनिया को सीमाओं का पाठ पढ़ाने वाले ब्रिटेन को उलझा रखा है. जिस देश ने रेडक्लिफ लाइन जैसी सरहदें खींचकर मुल्कों की तकदीर तय कर दी, वह आज कुदरत के बनाए घुमावदार रास्तों के सामने बेबस है.

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