- ईरानी नेवी ने कहा है कि बिना अनुमति के कोई भी जहाज होर्मुज से नहीं गुजर सकता और उल्लंघन पर कार्रवाई होगी
- ईरान ने लेबनान पर हमले करने वाले देशों को चेतावनी दी है और कहा कि लेबनान के साथ उसका समर्थन जारी रहेगा
- यूरोपीय संघ ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और शुल्क न लेने की आवश्यकता पर जोर दिया है
अमेरिका से सीजफायर के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा बयान दिया है. ईरान ने कहा है कि वह सीजफायर समझौते के तहत अगले दो हफ्तों तक पर दिन 15 से ज्यादा जहाजों को होर्मुज से गुजरने नहीं देगा. अमेरिका के साथ हुए सीजफायर के बीच ईरान की नेवी ने बुधवार को कहा था कि होर्मुज में अभी भी किसी भी जहाज को आने-जाने के लिए उनकी अनुमति की जरूरत होगी. अगर कोई जहाज बगैर उनकी अनुमति के जाता है तो उसे उड़ा दिया जाएगा.
उधर, ईरान ने लेबनान पर हमला करने वाले देशों को एक बार फिर चेतावनी दी है. ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा है कि ईरान अपने लेबनानी भाई-बहनों को कभी नहीं छोड़ेगा. लेबनान में इज़रायल का फिर से घुसपैठ करना, शुरुआती संघर्ष-विराम समझौते का खुला उल्लंघन है. यह धोखेबाज़ी और संभावित समझौतों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी का एक खतरनाक संकेत है. इन हरकतों का जारी रहना बातचीत को बेमानी बना देगा. हम ये एक बार फिर बता देना चाहते हैं कि अभी भी हमारी उंगलियाँ ट्रिगर पर ही हैं.
आपको बता दें कि ईरान ने गुरुवार को रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए वैकल्पिक शिपिंग मार्गों की घोषणा की है. ईरानी अधिकारियों ने मुख्य समुद्री क्षेत्र में समुद्री माइंस (Sea Mines) से संभावित खतरे का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है.ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने एक बयान जारी कर कहा कि समुद्री सुरक्षा के सिद्धांतों का पालन करने और माइंस से टकराव की आशंका से बचने के लिए सभी जहाजों को तय किए गए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना चाहिए. यह बयान ईरानी स्थानीय मीडिया में प्रकाशित हुआ है.
यूरोपीय संघ ने बताया गैरकानूनी
यूरोपीय संघ ने गुरुवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जानी चाहिए और इस पर कोई शुल्क या टोल नहीं लिया जाना चाहिए. यह बात ईरान द्वारा जहाजों को गुजरने देने के लिए शुल्क लेने के सुझाव के बाद कही गई. एक महीने से अधिक समय से चल रहे युद्ध के बाद ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के बाद वार्ता शुरू होने वाली है, ऐसे में खाड़ी के इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पूरी तरह से खोलना विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है.













