व्हाइट हाउस में 'वॉर' बनाम 'वॉलेट' की जंग, ट्रंप के सलाहकारों में दो फाड़, एक गुट ने कहा- युद्ध रोकें तो दूसरे न कहा- जारी रहे हमला

ईरान युद्ध को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर इस समय भारी खींचतान मची हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों के बीच 'वॉर'और 'वॉलेट'को लेकर दो फाड़ हो गए हैं.

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  • ट्रंप प्रशासन के भीतर ईरान के खिलाफ युद्ध को लेकर दो विचारधाराएं टकरा रही हैं
  • आर्थिक सलाहकार युद्ध को जल्द समाप्त कर इकॉनमी को बचाने और चुनावी नुकसान से बचाव चाहते हैं
  • कुछ रिपब्लिकन नेता ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने और परमाणु हथियार प्राप्ति रोकने के पक्ष में हैं
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अमेरिका इस वक्त दो जंग लड़ रहा है. एक जंग व्हाइट हाउस से मीलों दूर मिडिल ईस्ट के मैदान में ईरान के साथ हो रही है. तो वहीं दूसरी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ओवल ऑफिस के भीतर. ईरान में चल रहे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर खींचतान का माहौल है. ट्रंप के अपने ही सलाहकार इस बात पर बुरी तरह बंटे हुए हैं कि ईरान के खिलाफ जीत की घोषणा कब और कैसे की जाए, खासकर तब जब यह संघर्ष पूरे मिडिल ईस्ट में फैल रहा है. एक गुट चाहता है कि हमला जारी रहे, तो दूसरा गुट आसमान छू रहे कच्चे तेल के दाम देख सीजफायर का सुझाव दे रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप युद्ध जीतेंगे या अपनी इकॉनमी को बचाएंगे.

ट्रंप की टीम में दो फाड़: कौन क्या चाहता है?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के साथ युद्ध के भविष्य को लेकर ट्रंप प्रशासन के भीतर मुख्य रूप से दो विचारधाराएं टकरा रही हैं.

1. आर्थिक सलाहकार कर रहे इकॉनमी की चिंता
चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स, डिप्टी चीफ जेम्स ब्लेयर और ट्रेजरी विभाग के अधिकारी ट्रंप को लगातार चेतावनी दे रहे हैं. उनका तर्क है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा और तेल की कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं, तो रिपब्लिकन पार्टी को नवंबर 2026 के मिड-टर्म चुनावों में भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द जीत की घोषणा करके इस अभियान को खत्म किया जाए. इसके अलावा रणनीतिकार स्टीव बैनन और टीवी पर्सनैलिटी टकर कार्लसन जैसे लोग ट्रंप पर दबाव डाल रहे हैं कि वे मिडिल ईस्ट के किसी और लंबे युद्ध में न फंसें

2.  हॉक्स कर रहे जंग का समर्थन
वही दूसरी ओर रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम, टॉम कॉटन और मीडिया कमेंटेटर मार्क लेविन जैसे नेता चाहते हैं कि ईरान पर सैन्य दबाव कम न किया जाए. उनका मानना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों का कड़ा जवाब देना बेहद जरूरी है.

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तेल बना सबसे बड़ा सिरदर्द

अमेरिका में इस युद्ध का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है. पिछले 11 दिनों में अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत में 20% का भारी उछाल आया है और यह 3.50 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई है. यह ठीक वैसा ही उछाल है जैसा 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय देखा गया था. इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है. इधर ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की कसम खाई है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है.

वेनेज़ुएला जैसी जीत की थी उम्मीद, पर ईरान ने दे दी कड़ी टक्कर

सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के कुछ लोग मान रहे थे कि ईरान के खिलाफ भी उन्हें वैसी ही जीत मिल जाएगी जैसी 3 जनवरी को वेनेजुएला में मिली थी, जब राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को आसानी से पकड़ लिया गया था. लेकिन ईरान एक बेहद मजबूत और हथियारों से लैस देश है. भले ही अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों में कई शीर्ष ईरानी नेता ढेर हुए हैं और उनका बैलिस्टिक मिसाइल जखीरा तबाह हो गया है, लेकिन ईरान अभी भी डटकर पलटवार कर रहा है.

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ट्रंप के बदलते सुर

इस भारी अंदरूनी दबाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप के बयान भी लगातार बदल रहे हैं. बुधवार को केंटकी में एक रैली के दौरान उन्होंने पहले कहा कि हमने युद्ध जीत लिया है. लेकिन फिर अचानक पलटते हुए बोले, 'हम जल्दी वापस नहीं आना चाहते, क्या हम चाहते हैं? हमें काम पूरा करना है. हालांकि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने इन अंदरूनी कलह की खबरों को अटकलें करार दिया है.उन्होंने स्पष्ट किया है कि अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रंप का ही होगा.

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