खड़े हो जाइए... ट्रंप का ऑर्डर आया और सिर झुकाकर खड़े हो गए शहबाज, पाकिस्तान पीएम की घोर बेइज्जती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से दोहराया अपना झूठ, कहा मैंने 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के दौरान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की थी.

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डोनाल्ड ट्रंप का ऑर्डर आया और सिर झुकाकर खड़े हो गए शहबाज
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  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को बोर्ड ऑफ पीस बैठक में खड़े होने का आदेश दे दिया
  • ट्रंप ने 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव में मध्यस्थता का झूठा दावा करते हुए युद्धविराम की बात कही
  • ट्रंप ने दोनों देशों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी देकर शांति समझौता कराने का दावा किया
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के साथ पूरी दुनिया के सामने एक जुनियर जैसे व्यवहार किया, उन्हें अपनी ही तारीफ करते हुए खड़े होने का आदेश दे दिया. दरअसल ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में बोल रहे थे. यहां उन्होंने फिर से वही झूठ दोहराया है कि उन्होंने 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के दौरान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की थी. उन्होंने दावा किया कि लड़ाई नहीं रोकने की स्थिति में उन्होंने परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसियों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी. 

बता दें कि भारत ने पिछले साल हुए मई में हुए सैन्य टकराव में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता या किसी विमान के नुकसान के सभी दावों को लगातार खारिज किया है.

ट्रंप ने क्या कहा?

बोर्ड ऑफ पीस कार्यक्रम में दूसरे देशों के नेताओं के साथ शामिल हुए पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के लिए एक असहज पल तब आया, जब ट्रंप ने अपनी झूठी मध्यस्थता की बात करते हुए उनसे खड़े होने को कहा. ट्रंप ने कहा, “पाकिस्तान और भारत. यह बड़ा मामला था. मुझे लगता है कि आपको (शरीफ) खड़ा होना चाहिए. आइए, जरा खड़े हो जाइए. पाकिस्तान और भारत. बहुत-बहुत धन्यवाद.”

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिर कहा कि शरीफ ने यह दावा किया था कि ट्रंप ने दोनों देशों के बीच युद्धविराम कराकर 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई”.

ट्रंप ने शरीफ से कहा, “आपने यह बयान दिया था. मैंने कहा था 2.5 करोड़ जानें, असल में इससे भी ज्यादा हो सकती थीं, लेकिन यह वाकई बहुत अच्छी बात थी. वह युद्ध भड़क रहा था. विमान गिराए जा रहे थे, और वह पाकिस्तान और भारत के बीच था.” यानी इस बार ट्रंप ने पहले किए गए "1 करोड़ जानें बचाने” वाले अपने दावे को और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया.

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शांति समझौता कराने के लिए टैरिफ नीति को दबाव के तौर पर इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा, “मैंने दोनों को फोन किया. मैं उन्हें थोड़ा जानता था. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत अच्छी तरह जानता हूं. मैंने उनसे कहा कि अगर आप लोग यह मामला नहीं सुलझाते तो मैं आप दोनों के साथ व्यापार समझौते नहीं करूंगा. और फिर अचानक हम एक समझौते पर पहुंच गए.”

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उन्होंने आगे कहा, “मैंने कहा, अगर आप लड़ेंगे तो मैं आपके दोनों देशों पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दूंगा. दोनों लड़ना चाहते थे. लेकिन जब पैसे की बात आई, तो पैसा सबसे बड़ा होता है. जब बहुत पैसा गंवाने की बात आई, तो उन्होंने कहा कि शायद हम लड़ना नहीं चाहते. 11 जेट गिराए गए. बहुत महंगे जेट.” इससे पहले ट्रंप यह दावा कर चुके थे कि इस संघर्ष में सात जेट गिराए गए थे.

ट्रंप के बार-बार के झूठे दावे और भारत का रुख

ट्रंप बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि व्हाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए. उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष रोकने का श्रेय भी 80 से ज्यादा बार लिया है. 10 मई 2025 के दिन उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका की मध्यस्थता से बातचीत के बाद दोनों पड़ोसी देशों ने “तुरंत और पूरी तरह” युद्धविराम पर सहमति जताई है.

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हालांकि भारत का कहना है कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष रोकने पर सहमति दोनों देशों की सेनाओं के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधी बातचीत के बाद बनी थी, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से. बता दें कि भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. यह कार्रवाई पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर की गई थी. यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को हुए पहलाम हमले के जवाब में था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे.

यह भी पढ़ें: ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में शामिल भारत ने क्या दिया मैसेज?

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