- अमेरिका जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या कम करने पर विचार कर रहा है, जिसका फैसला जल्द लिया जाएगा
- जर्मनी के चांसलर मर्ज ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर संदेह जताया और इसके नतीजों पर चिंता व्यक्त की थी
- अमेरिका उन पश्चिमी सहयोगी देशों को सजा देने पर विचार कर रहा है, जिन्होंने ईरान के खिलाफ समर्थन नहीं दिया है
US Iran War Updates: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अगर किसी की बात नापसंद आती है तो फिर वो उसे उलटे धमकी देने में देरी नहीं करते. उन्होंने फिर से एकबार ठीक यही किया है. अमेरिका के राष्ट्रपति ने बुधवार, 29 अप्रैल को कहा कि अमेरिका जर्मनी में अपने सैनिकों की संख्या कम करने पर विचार कर रहा है. यह बात जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ ईरान युद्ध को लेकर हुए विवाद के बीच सामने आई है. ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा, "अमेरिका जर्मनी में सैनिकों की संख्या कम करने की संभावना का अध्ययन और समीक्षा कर रहा है, और इस पर फैसला जल्द ही लिया जाएगा.”
कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस के अनुसार, 2024 में जर्मनी में अमेरिका के 35,000 से ज्यादा सैनिक थे. हालांकि अब यह संख्या बढ़कर करीब 50,000 के आसपास मानी जा रही है, जैसा कि जर्मन मीडिया में बताया गया है. अपने दोनों कार्यकाल के दौरान ट्रंप कई बार जर्मनी और दूसरे यूरोपीय सहयोगी देशों में अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम करने की धमकी दे चुके हैं. यह उनकी नाटो गठबंधन की आलोचना का हिस्सा रहा है.
अब ऐसा लग रहा है कि वॉशिंगटन उन सहयोगी देशों को सजा देना चाहता है, जिन्होंने ईरान में अमेरिका-इजराइल युद्ध का समर्थन नहीं किया या होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान का मुकाबला करने के लिए सेना नहीं भेजी.
जर्मन चांसलर की यह बात ट्रंप को नहीं आई रास
जर्मन चांसलर मर्ज इस हफ्ते की शुरुआत में दिए गए अपने बयान के बाद ट्रंप के निशाने पर आ गए, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान बातचीत की मेज पर अमेरिका को “शर्मिंदा” कर रहा है. ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि मर्ज “सोचते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है. उन्हें पता नहीं है कि वह क्या कह रहे हैं!”
जर्मनी के नेता ने बुधवार को इस विवाद को कम करके दिखाया और कहा कि उनके संबंध अभी भी अच्छे हैं. मर्ज ने बर्लिन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मेरे नजरिए से, अमेरिकी राष्ट्रपति और मेरे बीच व्यक्तिगत संबंध पहले जैसे ही अच्छे हैं.” जर्मन नेता ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही ईरान पर अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर संदेह जताया था. उन्होंने कहा, “हम जर्मनी और यूरोप में इसके नतीजों से काफी प्रभावित हो रहे हैं.”
ऐसा भी लग रहा है कि अमेरिकी सरकार उन पश्चिमी सहयोगी देशों के खिलाफ और कदम उठा सकता है, जिन्होंने ईरान के खिलाफ मदद नहीं की. पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अमेरिका स्पेन को नाटो से निलंबित करने पर विचार कर रहा है, और ब्रिटेन के फॉकलैंड द्वीपों पर नियंत्रण को लेकर अपनी स्थिति की समीक्षा कर सकता है. बाद में वॉशिंगटन ने फॉकलैंड द्वीपों को लेकर अपनी तटस्थता दोहराई. यह द्वीप अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच विवादित हैं. दोनों देशों के बीच 1982 में इन द्वीपों को लेकर छोटा लेकिन खून-खराबे वाला युद्ध हुआ था, जिसमें ब्रिटेन की जीत हुई थी.













