- अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अपने एनरिच यूरेनियम को अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है
- ईरान के पास एनरिच यूरेनियम का भंडार है, जो हथियार बनाने के लिए आवश्यक उच्च शुद्धता तक पहुंच सकता है
- अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान का यूरेनियम मुख्य रूप से 2 परमाणु ठिकानों में जमीन के नीचे दबा हुआ है
US Iran War and Ceasefire Talks: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अपने “न्यूक्लियर डस्ट” को अमेरिका को देने के लिए तैयार है. दरअसल ट्रंप ने बार-बार “न्यूक्लियर डस्ट” शब्द का प्रयोग ईरान के समृद्ध या एनरिच यूरेनियम के लिए किया है. यहां बहुत बड़ा दावा है क्योंकि यह जंग शुरू होने के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर था. ईरान की तरफ से अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि उसने अमेरिका या पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ बातचीत में ऐसी किसी शर्त को माना है. लेकिन अगर यह सही होता है, तो यह अमेरिका के लिए ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म की दिशा में बड़ा कदम होगा.
आपको बता दें कि परमाणु प्लांट में बिजली पैदा करने या परमाणु हथियार बनाने के लिए शुद्ध किए हुए या एनरिच यूरेनियम को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. प्राकृतिक यूरेनियम में केवल 0.7% U-235 होता है, जिसे रिएक्टर ईंधन के लिए 3-5% या हथियारों के लिए 90% से अधिक तक शुद्ध (एनरिच) किया जाता है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) मानती है कि ईरान का एनरिच यूरेनियम जमीन के बहुत गहराई में दबा हुआ है. यह पिछले साल जून में अमेरिका द्वारा ईरान के तीन बड़े परमाणु ठिकानों पर हमलों के बाद हुआ था.
ईरान के पास कितना यूरेनियम है?
पिछले साल जून में अमेरिका और इजरायल के हमलों से पहले, माना जाता था कि ईरान के पास 60% तक एनरिच लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम और 20% तक एनरिच करीब 200 किलोग्राम यूरेनियम था, जिसे आसानी से 90 प्रतिशत हथियार-ग्रेड यूरेनियम में बदला जा सकता है. वहीं ईरान का कहना है कि वह यूरेनियम को शुद्ध (एनरिच) केवल बिजली पैदा करने के लिए कर रहा है, न कि परमाणु हथियार बनाने के लिए.
यह ईरान की कुल बिजली उत्पादन का सिर्फ लगभग 1 प्रतिशत है. अपने बिजली तंत्र में मौजूद 25,000 मेगावाट की कमी को पूरा करने के लिए ईरान को बुशेहर जैसे लगभग 25 और प्लांट बनाने होंगे, जिन्हें बनाने में करीब 20 साल लगते हैं.
जर्मनी के सरकारी फंड वाले पब्लिकेशन डॉयचे वेले (डीडब्ल्यू) से बात करते हुए, अमेरिका की जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी के इनर्जी एक्सपर्ट उमुद शोकरी ने कहा, “ईरान के पास दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस और तेल भंडार हैं, जिससे वह परमाणु ऊर्जा के मुकाबले बहुत कम लागत में बिजली बना सकता है. असल में, ईरान की बिजली का ज्यादातर हिस्सा प्राकृतिक गैस से आता है, जबकि परमाणु ऊर्जा का योगदान बहुत कम है और वह भी सिर्फ बुशेहर रिएक्टर से.”
ईरान का न्यूक्लियर डस्ट कहां दबा है?
माना जाता है कि ईरान का ज्यादा यूरेनियम एक पहाड़ी इलाके के नीचे मलबे में दबा हुआ है, जहां अमेरिका ने बमबारी की थी. ट्रंप ने उस समय दावा किया था कि इससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम “पूरी तरह खत्म” हो गया है. IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रोसी के अनुसार, ईरान का यूरेनियम मुख्य रूप से उन तीन जगहों में से दो जगहों पर रखी गई है, जिन पर अमेरिका ने हमला किया था- इस्फहान के परमाणु परिसर में जमीन के नीचे बनी सुरंग और नतांज में एक भंडार.
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान के पास यूरेनियम को एनरिच करने के लिए सेंट्रीफ्यूज मशीनें हैं और वह जमीन के नीचे नया एनरिचमेंट सेंटर (जहां यूरेनियम को एनरिच किया जाता है) बनाने की क्षमता भी रखता है.
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