- अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच दूरी बनी हुई है
- राष्ट्रपति ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में युद्धपोत और लड़ाकू विमान भेजे हैं और सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं
- ट्रंप ने कहा है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो दस से पंद्रह दिनों में हमले का फैसला कर सकते हैं
क्या अमेरिका परमाणु समझौते के लिए हो रही बातचीत के बीच ही ईरान पर हमला करेगा? क्या यह हमला 10 दिन के अंदर होने वाला है. सवाल बहुत हैं और जवाब सिर्फ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हैं. अबतक उन्होंने ईरान पर हमले की जो धमकियां दी हैं, उनमें यह साफ नहीं है कि अगर छोटा या लंबा युद्ध हुआ तो ईरान के अंदर अमेरिका का अंतिम लक्ष्य क्या होगा. ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में युद्धपोत और दर्जनों लड़ाकू विमान भेजे हैं. उनके पास कई सैन्य विकल्प हैं, जो पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकते हैं.
सवाल है कि क्या ट्रंप ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को टारगेट बनाकर हमले करेंगे, जो वहां की सरकार की मुख्य ताकत है? क्या वह ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को निशाना बनाएंगे, जैसा इजरायल चाहता है? या फिर तेहरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करेंगे? ईरान ने तो साफ चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह कड़ा बदला लेगा.
Q- ट्रंप के पास क्या विकल्प हैं?
ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि अगर परमाणु समझौता नहीं हुआ तो वह 10 या 15 दिनों में तय करेंगे कि हमला करना है या नहीं. न्यूज वेबसाइट एक्सियोस के अनुसार, ट्रंप को उनके सैन्य अधिकारियों ने कई सैन्य विकल्प दिखाए गए हैं, जिनमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई पर सीधा हमला भी शामिल है. ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वह कूटनीतिक रास्ता पसंद करते हैं. वह ऐसा समझौता चाहते हैं जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और हिजबुल्लाह व हमास जैसे समूहों को समर्थन देने के मुद्दे को भी शामिल करे. लेकिन ईरान ने ऐसी शर्तें मानने से इनकार किया है.
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार वॉशिंगटन स्थित मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एनालिस्ट एलेक्स वटांका ने कहा कि ट्रंप प्रशासन शायद एक सीमित युद्ध चाहता है, जिससे ईरान के अंदर ताकत का संतुलन बदले लेकिन अमेरिका किसी बड़े दलदल में न फंसे. वटांका के अनुसार, ईरान को अब एक छोटे लेकिन तेज सैन्य अभियान की आशंका है, जो उसकी मिसाइल व्यवस्था को कमजोर कर दे और उसकी ताकत घटा दे. यह जून 2025 में इजरायल के साथ हुए 12 दिन के युद्ध के बाद दूसरा जोरदार झटका होगा.
Q- अमेरिका के हमले का आधार क्या होगा?
ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी सेना ने जून 2025 के हमलों में ही ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों (यूरेनियम संवर्धन केंद्र) को नष्ट कर दिया है. जनवरी में ईरान में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई से दबा दिया और कई लोगों की जान गई. ट्रंप ने कई बार कहा कि वह ईरानी लोगों की “मदद” के लिए सैन्य हस्तक्षेप कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
ट्रंप अक्सर कहते हैं कि उन्होंने मिडिल ईस्ट में शांति लाई है. वह गाजा में हमास और इज़राइल के बीच हुए सीजफायर का उदाहरण देते हैं, हालांकि वह कई बार टूट चुका है. उनका यह भी कहना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन से क्षेत्र में शांति मजबूत होगी. लेकिन अमेरिका के अंदर विपक्षी डेमोक्रेटिक नेता चिंतित हैं कि ट्रंप अमेरिका को एक खतरनाक संघर्ष में ले जा रहे हैं. वे मांग कर रहे हैं कि ट्रंप युद्ध से पहले कांग्रेस से सलाह लें, क्योंकि युद्ध घोषित करने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस के पास है.
Q- मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने कितनी सैन्य ताकत झोंक दी है?
अमेरिका के 13 युद्धपोत इस समय मिडिल ईस्ट में तैनात हैं. इनमें एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन, नौ डेस्ट्रॉयर और तीन फ्रिगेट शामिल हैं. अभी और भी युद्धपोत भेजे जा रहे हैं. दुनिया का सबसे बड़ा जहाज, यूएसएस जेराल्ड फोर्ड, जिब्राल्टर जलडमरूमध्य से होते हुए भूमध्य सागर में प्रवेश करता देखा गया है. इन जंगी जहाजों पर मौजूद विमानों के अलावा अमेरिका ने दर्जनों लड़ाकू विमान और हजारों सैनिक भी मिडिल ईस्ट में तैनात कर रखे हैं.
Q- आखिर अमेरिका का मकसद क्या है?
एएफफी की रिपोर्ट के अनुसार काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के पूर्व अध्यक्ष रिचर्ड हास ने कहा कि यह साफ नहीं है कि किसी भी स्तर के युद्ध का ईरान की सरकार पर क्या असर होगा. उन्होंने लिखा कि इससे सुप्रीम लीडर खामेनेई की सरकार कमजोर भी हो सकती है या मजबूत भी. और अगर यह सरकार गिरती है, तो उसके बाद क्या होगा, यह कोई नहीं जानता.
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सीनेट में कहा कि अगर ईरान के सुप्रीम लीडर सत्ता से हटते हैं, तो आगे क्या होगा यह कोई निश्चित रूप से नहीं कह सकता, सिर्फ उम्मीद की जा सकती है कि कोई अंदरूनी व्यवस्था शांतिपूर्ण बदलाव की ओर बढ़े.
खाड़ी के अरब देश, जिनके ईरान से करीबी संबंध हैं, उन्होंने ट्रंप को चेतावनी दी है कि वह हस्तक्षेप न करें. उन्हें डर है कि बदले में उन पर हमले हो सकते हैं और क्षेत्र अस्थिर हो सकता है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की मोना याकूबियन ने कहा कि ईरान वेनेजुएला से ज्यादा जटिल देश है. उन्होंने कहा कि ईरान में सत्ता के कई केंद्र हैं और अगर शीर्ष नेतृत्व पर हमला हुआ तो देश के अंदर बड़ा अराजक माहौल बन सकता है.













