टैरिफ पर पीछे हटने को ट्रंप नहीं तैयार, भारत समेत 16 देशों पर अमेरिका ने बैठाई जांच- EXPLAINED

Donald Trump's Tariff War: डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने अमेरिका से व्यापार करने वाले 16 प्रमुख पार्टनर देशों के खिलाफ जांच बैठा दी है. इसमें इस बात की जांच की जाएगी कि क्या यह देश अमेरिका के साथ “अनुचित व्यापार व्यवहार” (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) करते हैं.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

ईरान के खिलाफ जंग छेड़ने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति अपने टैरिफ वॉर को भी रोकने का नाम लेने नहीं दिख रहे हैं, भले ही उन्हें इस मोर्चे पर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट से झटका लग चुका है. डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने अमेरिका से व्यापार करने वाले 16 प्रमुख पार्टनर देशों के खिलाफ जांच बैठा दी है. इसमें इस बात की जांच की जाएगी कि क्या यह देश अमेरिका के साथ “अनुचित व्यापार व्यवहार” (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) करते हैं. जिन देशों के खिलाफ जांच बैठाई गई है, उनमें भारत, चीन और बांग्लादेश भी शामिल हैं. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि टैरिफ का दबाव फिर से बनाया जा सके, क्योंकि पिछले महीने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ को गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया था.

ट्रंप किस हक से जांच बैठा रहे?

ये जांच अमेरिका के ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत की जा रही है. यह कानून अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव को यह अधिकार देता है कि अगर किसी देश पर अनुचित व्यापार करने का आरोप साबित होता है, तो उस पर टैरिफ या अन्य जवाबी कदम लगाए जा सकते हैं. अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमीसन ग्रीयर ने कहा कि इस जांच के कारण जुलाई तक चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, साउथ कोरिया और मैक्सिको पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं.

अतिरिक्त उत्पादन क्षमता (एक्सेस कैपेसिटी) से जुड़ी इस जांच में अन्य व्यापारिक साझेदार भी शामिल हैं, जैसे ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्ज़रलैंड और नॉर्वे. खास बात है कि अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार कनाडा इस जांच के निशाने पर नहीं है.

ग्रीयर ने पत्रकारों से कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा, “ये जांच उन अर्थव्यवस्थाओं (देशों) पर केंद्रित होंगी जिनके बारे में हमारे पास सबूत हैं कि वहां ढांचागत रूप से ज्यादा उत्पादन क्षमता है और कई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जरूरत से ज्यादा उत्पादन हो रहा है. यह स्थिति अक्सर बड़े और लगातार व्यापार अधिशेष या कम इस्तेमाल हो रही उत्पादन क्षमता के कारण दिखाई देती है.”

जबरन मजदूरी की भी जांच करेगी ट्रंप सरकार

ग्रीयर ने यह भी कहा कि गुरुवार को वे ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत एक और जांच शुरू करेंगे, जिसका उद्देश्य जबरन मजदूरी से बने सामान के अमेरिकी आयात पर प्रतिबंध लगाना है. इस जांच में 60 से ज्यादा देशों को कवर किया जाएगा. बता दें कि अमेरिका पहले ही चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और अन्य सामान के आयात पर कार्रवाई कर चुका है. यह कार्रवाई उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत की गई थी, जिसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कानून के रूप में मंजूरी दी थी. नई जांच से ऐसी कार्रवाई अन्य देशों तक भी बढ़ सकती है.

ग्रीयर ने कहा कि वे चाहते हैं कि दूसरे देश भी लगभग 100 साल पुराने अमेरिकी व्यापार कानून की तरह जबरन मजदूरी से बने सामान पर प्रतिबंध लागू करें. अमेरिका का आरोप है कि चीन के अधिकारी पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग में उइगर और अन्य मुस्लिम समूहों के लिए श्रम शिविर (लेबर कैंप) चला रहे हैं. हालांकि बीजिंग ने इन आरोपों से इनकार किया है.

ग्रीयर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सेक्शन 301 की जांच और उससे जुड़े संभावित उपाय जुलाई से पहले पूरे हो जाएंगे. जुलाई में वे अस्थायी टैरिफ खत्म हो रहे हैं जो ट्रंप ने फरवरी के अंत में लगाए थे.

ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से लगा है झटका

20 फरवरी को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय आपातकाल कानून के तहत लगाए गए ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था. इसके बाद ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 (सेक्शन 122) के तहत 150 दिनों के लिए 10% टैरिफ लगा दिया. ग्रीयर ने अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से जुड़ी जांच के लिए तेज समयसीमा भी बताई. इसके तहत 15 अप्रैल तक सार्वजनिक टिप्पणियां स्वीकार की जाएंगी और लगभग 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी.

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ग्रीयर ने कहा कि ट्रंप सरकार द्वारा पहले से संकेत दिए जाने के कारण ये नई जांच व्यापारिक साझेदार देशों के लिए कोई हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि देशों को अपने समझौतों का पालन करना चाहिए, हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं कहा कि इससे वे भविष्य के सभी सेक्शन 301 टैरिफ से पूरी तरह बच जाएंगे. उन्होंने कहा कि ट्रंप टैरिफ लगाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.

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