ट्रंप क्या नई ईस्ट इंडिया कंपनी बनाएंगे? 1 साल में ट्रिपल प्लान से बता दिया अंग्रेजी हुकूमत से कम नहीं

1 Year of Donald Trump: एक साल के अंदर ही अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे कई विवादास्पद कदम उठाए हैं, जिन्होंने विश्व व्यवस्था (वर्ल्ड ऑर्डर) को हिलाकर रख दिया है.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले वर्ष में विवादास्पद कदम उठाकर विश्व व्यवस्था को प्रभावित किया है
  • फरवरी 2025 में ट्रंप ने गाजा पर कब्जा करने की योजना बनाई, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने जातीय सफाए बताया था
  • जनवरी में वेनेजुएला में अमेरिकी सेना की कार्रवाई में निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिकी जेल में रखा गया है
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप! अपने आप में ही इनका नाम एक पूरा वाक्य है, एक खबर है, दुनिया के कई हिस्सों में खलबली की वजह है. ट्रंप इस रफ्तार से एक के बाद एक फैसले ले रहे हैं कि यह यकीन करना भी मुश्किल है कि आने वाली 20 जनवरी को जाकर इनके दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होंगे. एक साल के अंदर ही अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे कई विवादास्पद कदम उठाए हैं, जिन्होंने विश्व व्यवस्था (वर्ल्ड ऑर्डर) को हिलाकर रख दिया है. उन्होंने वेनेजुएला पर हमला किया, वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठाकर अमेरिकी जेल में कैद कर दिया, उनको कुर्सी से हटा दिया, वहां के तेल के कुओं को अपना ताला लगा दिया. इतना ही नहीं वो ग्रीनलैंड के बार-बार के ना के बावजूद उस पर कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं.

ट्रंप भले अमेरिका फर्स्ट के नारे के पीछे छिपने की कोशिश करें, भले वो अपनी नीतियों को अमेरिकी आर्थिक और सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने वाला बताते हुए बचाव करें. लेकिन कई एक्सपर्ट्स के लिए, उनकी हरकतें और उनके फैसले 19वीं सदी की औपनिवेशिक शक्तियों की तरह ही हैं. जो काम आज से 100-200 साल पहले अंग्रेजी हुकूमत किया करती थी, 21वीं सदी में वो ही काम ट्रंप साहब कर रहे हैं. इसके 3 उदाहरण हमारे सामने हैं.

गाजा पर कब्जा

दूसरी बार राष्ट्रपति की कुर्सी संभाले अभी एक महीने ही हुए थे कि फरवरी 2025 में ट्रंप ने सीधा कहा था कि अमेरिका गाजा पर कब्जा करेगा. संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने इस प्रस्ताव की निंदा की और इसे “जातीय सफाए” जैसा बताया. बाद में उन्होंने इस बात से धीरे-धीरे पीछे हटना शुरू किया. आगे अक्टूबर में गाजा में एक कमजोर संघर्षविराम (सीजफायर) शुरू करने के लिए ट्रंप ने एक और योजना दी. इसमें कहा गया कि गाजा को अस्थायी रूप से एक “शांति बोर्ड” चलाएगा, जिसका अध्यक्ष खुद ट्रंप होंगे. इस योजना पर इजरायल और हमास दोनों ने सहमति दी. यूएन सुरक्षा परिषद ने इस बोर्ड को गाजा में अस्थायी अंतरराष्ट्रीय बल बनाने की मंजूरी दी.

कई विशेषज्ञों ने कहा कि यह योजना पुराने औपनिवेशिक शासन जैसी लगती है. यूएन के सलाहकार जेफ्री सैक्स ने इसे “शांति के नाम पर साम्राज्यवाद” कहा है. अन्य यूएन विशेषज्ञों ने भी इसे औपनिवेशिक दौर की याद दिलाने वाला बताया है.

वेनेजुएला पर हमला और तेल पर नजर

जनवरी की शुरुआत में ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी सेना की कार्रवाई का आदेश दिया. इसमें पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया और उन्हें न्यूयॉर्क लाकर मुकदमा चलाया जा रहा है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला को चलाएगा. मादुरो की पूर्व उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया, जो अमेरिकी निगरानी में सरकार चला रही हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में काम शुरू करेंगी, क्योंकि वहां दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. आलोचकों ने कहा कि ट्रंप का ध्यान तेल पर ज्यादा है. इसलिए यह सवाल उठता है कि मादुरो की गिरफ्तारी सच में वेनेजुएला में कानून व्यवस्था बनाने के लिए थी या तेल के लिए. यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इससे दुनिया कम सुरक्षित हुई है.

ग्रीनलैंड को लेकर बार-बार धमकी

ट्रंप ने कई बार कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड का मालिक बनना चाहिए. ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त हिस्सा है और वहां अमेरिका का सैन्य अड्डा भी है. ट्रंप का कहना है कि रूस या चीन को रोकने के लिए यह जरूरी है. भले ग्रीनलैंड और डेनमार्क ने साफ कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है, लेकिन ट्रंप ने उसे हड़पने के लिए सैन्य ताकत के प्रयोग से इनकार नहीं कर रहे हैं. कमाल की बात है कि डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो के सदस्य हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ऐसी सोच से अमेरिका अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में एक हिंसक और बिना नियम चलने वाले देश जैसा दिख सकता है, वैसा बन सकता है. ट्रंप पहले कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की धमकी भी दे चुके हैं, हालांकि हाल में उन्होंने यह बात नहीं दोहराई है.

(इनपुट- रॉयटर्स)

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