ग्रीनलैंड पर ट्रंप की NATO से डील! अमेरिका के कब्जे में आएगा डेनमार्क का ये हिस्सा? जानें 4 सवाल और जवाब

Donald Trump announces Greenland 'framework': अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अब वह ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर यूरोप के सहयोगी देशों पर प्लान किए गए टैरिफ को भी रद्द कर रहे हैं.

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Donald Trump's Greenland Deal: ग्रीनलैंड पर ट्रंप की NATO से क्या डील हुई?
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  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड कब्जाने की योजना से पीछे हटकर NATO महासचिव संग समझौते की रूपरेखा तय की
  • अमेरिका ने यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी से लगाए जाने वाले टैरिफ को ग्रीनलैंड समझौते के आधार पर रद्द कर दिया है
  • नाटो महासचिव ने ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर चर्चा से इनकार किया, क्षेत्र को रूस-चीन से सुरक्षित रखने पर जोर दिया
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार, 21 जनवरी को डेनमार्क के हाथों से बलपूर्वक ग्रीनलैंड को छीनने की धमकी से पीछे हट गए हैं और दावा किया है कि उन्होंने इस आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक अस्पष्ट समझौता कर लिया है. उन्होंने स्विट्जलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की सालाना बैठक में मीडिया से कहा कि ग्रीनलैंड पर समझौते पर नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ बातचीत में हुई थी और यह "हमेशा" तक कायम रहेगा. ट्रंप का कहना है कि वह और मार्क रुटे 'भविष्य के समझौते की रूपरेखा (फ्रेमवर्क)' पर सहमत हुए हैं.

इतना ही नहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि अब वह ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर यूरोप के सहयोगी देशों पर प्लान किए गए टैरिफ को भी रद्द कर रहे हैं.

Q- ग्रीनलैंड पर अमेरिका और नाटो के बीच क्या समझौता हुआ है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम पर संवाददाताओं से कहा कि समझौते पर नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ बातचीत हुई है. कायदे से अभी कोई समझौता नहीं हुआ है बल्कि 'भविष्य के समझौते की रूपरेखा' पर सहमति बनी है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा है, "नाटो के महासचिव मार्क रुटे के साथ मेरी बहुत सार्थक बैठक के आधार पर, हमने ग्रीनलैंड और वास्तव में, पूरे आर्कटिक क्षेत्र के संबंध में भविष्य के समझौते की रूपरेखा तैयार की है. यदि यह समाधान पूरा हो जाता है, तो यह अमेरिका और सभी नाटो देशों के लिए बहुत अच्छा होगा. इस समझ के आधार पर, मैं वे टैरिफ नहीं लगाऊंगा जो 1 फरवरी को लागू होने वाले थे. गोल्डन डोम के संबंध में अतिरिक्त चर्चाएं की जा रही हैं क्योंकि यह ग्रीनलैंड से संबंधित है. चर्चा आगे बढ़ने पर और जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और आवश्यकतानुसार विभिन्न अन्य लोग वार्ता के लिए जिम्मेदार होंगे - वे सीधे मुझे रिपोर्ट करेंगे."

इस ऐलान से पहले इस मंच पर ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए अमेरिकी सेना का इस्तेमाल नहीं करेंगे. फिर इसके कुछ घंटे बाद उन्होंने इस समझौते के बारे में बताया और कहा कि "मुझे लगता है कि यह हर किसी को वास्तव में अच्छी स्थिति में रखता है, खासकर जब यह सुरक्षा, और खनिजों और बाकी सभी चीजों से संबंधित है." 

Q- क्या ग्रीनलैंड अमेरिका के कब्जे में आ जाएगा?

ट्रंप ने इस बात का कोई संकेत नहीं दिया कि वह इस समझौते में ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की अपनी बार-बार की जिद्द में सफल हुए हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या डेनमार्क इस क्षेत्र पर नियंत्रण जारी रखेगा, नाटो महासचिव रुटे ने कहा कि ट्रंप के साथ उनकी बातचीत में ग्रीनलैंड की संप्रभुता का विषय "नहीं आया". वहीं फॉक्स न्यूज की "ब्रेट बेयर के साथ स्पेशल रिपोर्ट" से बात करते हुए, रूट ने ग्रीनलैंड के लिए नई स्थिति क्या हो सकती है, इसके बारे में कुछ ही डिटेल्स दिए, केवल यह कहा कि नाटो आर्कटिक क्षेत्र को रूस या चीन जैसे विरोधियों से सुरक्षित करने के लिए काम करना जारी रखेगा.

Q- क्या अमेरिका अब यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाएगा?

सीधा जवाब है नहीं. ट्रंप ने कहा है कि वह ग्रीनलैंड पर नाटो महासचिव के साथ 'भविष्य के समझौते की रूपरेखा' पर सहमति के बाद उन्होंने यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी से लगाए जाने वाले टैरिफ को रद्द कर दिया है. दरअसल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी से अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान ग्रीनलैंड को खरीदने के अमेरिकी प्रस्ताव के विरोध के कारण किया था. उन्होंने यह टैरिफ उन 8 यूरोपीय देशों पर लगाए जो उनके इस विचार का विरोध कर रहे थे. 1 फरवरी से इन देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगना था. ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि 1 जून 2026 तक ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं होता है, तो इस टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा. अब ट्रंप के अनुसार इसे रद्द कर दिया गया है.

Q- यूरोप और मार्केट के लिए यह अच्छी खबर क्यों?

वैश्विक बाजार जो दरार और टैरिफ के खतरे से परेशान थे, अब उन्हें राहत मिली है. वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांक चढ़ गए हैं. ट्रंप की धमकियों ने दशकों में सबसे बड़े ट्रान्साटलांटिक संकटों में से एक को जन्म दिया था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि ट्रंप एक साथी देश के खिलाफ आक्रामकता के माध्यम से नाटो को अकेले ही नष्ट कर सकते हैं. अब उनके स्पष्ट बदलाव से डेनमार्क में राहत मिली है, जो लंबे समय से अमेरिका का एक दृढ़ सहयोगी है. लेकिन ट्रंप की आक्रामक भाषा ने उसके लिए विश्वासघात की भावनाओं को जन्म दिया है.

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डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने डेनिश सार्वजनिक टेलीविजन डीआर को बताया, "ट्रंप ने कहा कि वह व्यापार युद्ध रोक देंगे, उन्होंने कहा, 'मैं ग्रीनलैंड पर हमला नहीं करूंगा. ये सकारात्मक संदेश हैं."

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