- 1935 की महामंदी के बाद पहली बार, बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक अपना देश छोड़कर विदेश में बस रहे हैं
- 2025 में विदेश से अमेरिका आकर बसने वालों की संख्या 26-27 लाख रह गई, जबकि 2023 में 60 लाख लोग आए थे
- 2024 में नागरिकता छोड़ने की अर्जी देने वालों की संख्या 48 फीसदी बढ़ गई. 2025 में इसके और बढ़ने की संभावना है
अमेरिका में पिछले कुछ समय से बड़ा भौगोलिक बदलाव देखने को मिल रहा है. फाइनेंशियल डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में अमेरिकी देश छोड़कर जा रहे हैं. साल 1935 की महामंदी के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है. ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन का अनुमान है कि पिछले साल अमेरिका से करीब 1.5 लाख लोगों ने पलायन किया था. 2026 में यह संख्या और बढ़ सकती है. कई एक्सपर्ट्स इसे अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप सरकार आने से जोड़कर देख रहे हैं और इसे डोनाल्ड डैश नाम दे रहे हैं.
अमेरिका आकर बसने वाले भी घटे
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि 2025 में विदेश से अमेरिका में आकर बसने वालों की कुल संख्या घटकर 26-27 लाख रह गई, जबकि 2023 में यह आंकड़ा करीब 60 लाख था. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने 15 देशों के 2025 के पूरे या आंशिक डेटा का विश्लेषण करके पता लगाया कि कम से कम एक लाख 80 हजार अमेरिकी इन देशों में जाकर बस गए थे. पूरे आंकड़े आने के बाद यह संख्या और भी बढ़ सकती है.
कोरोना के बाद पलायन 5 गुना बढ़ा
रिपोर्ट में बताया गया कि पुर्तगाल में कोरोना महामारी के बाद से अमेरिकी निवासियों की संख्या 500 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है. 2024 में ही इसमें 36 फीसदी का उछाल आया. 10 हजार से ज्यादा अमेरिकी 2025 में आयरलैंड पहुंचे, जो उससे पिछले साल से लगभग दोगुना है. फाइनेंशियल डेली ने बताया कि पिछले साल जर्मनी से जितने लोग अमेरिका गए थे, उससे कहीं ज्यादा लोग अमेरिका से जर्मनी चले गए.
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अमेरिका छोड़कर क्यों जा रहे लोग?
रिलोकेशन कंपनियां भी कह रही हैं कि अमेरिका से बाहर जाने वालों की डिमांड बढ़ रही है. एक्सपैट्सी की फाउंडर जेन बार्नेट के हवाले से कहा गया है कि पहले जो अमेरिकी देश छोड़कर जाते थे, वो सुपर एडवेंचरस और अच्छे क्रेडेंशियल वाले होते थे, लेकिन अब मेरी तरह आम लोग भी बाहर जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी का टारगेट 10 लाख अमेरिकियों को बाहर मूव कराना है. उनका कहना है कि अमेरिका में भले ही सैलरी ज्यादा मिलती हो, लेकिन यूरोप में क्वालिटी लाइफ ज्यादा है.
व्हाइट हाउस ने क्या बताया?
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था दूसरे विकसित देशों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है और सरकार लाखों गैरकानूनी इमिग्रेंट्स को डिपोर्ट कर रही है. बहुत से अल्ट्रा-हाई नेट वर्थ विदेशियों को भी टारगेट किया जा रहा है. इनमें से कई तो अमेरिका में बसने के लिए गोल्ड कार्ड के 1 मिलियन डॉलर का भुगतान कर रहे हैं. अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने पिछले साल 6.75 लाख डिपोर्टेशन और 22 लाख सेल्फ डिपोर्टेशन की जानकारी दी थी.
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अमेरिका आने वाले छात्र भी घटे
अमेरिका आने वाले विदेशी स्टूडेंट्स की संख्या में भी कमी आई है. एजुकेशन ट्रेंड्स बताते हैं कि अमेरिका आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में 17 फीसदी की कमी आई है. इसके आगे और भी कम होने की संभावना है. अमेरिकियों में यूरोपीय यूनिवर्सिटियों में दाखिला लेने का ट्रेंड बढ़ रहा है. मार्च 2025 तक 6,600 अमेरिकी ब्रिटेन की नागरिकता लेने के लिए आवेदन कर चुके थे. आयरलैंड से अमेरिकियों को जारी पासपोर्ट 2024 में 31,825 थे, जिनकी संख्या 2025 में 40 हजार से अधिक हो गई.
अमेरिकी नागरिकता भी छोड़ रहे
द वॉल स्ट्रीट जर्नल का दावा है कि अमेरिकी नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या भी बढ़ रही है. अमेरिकी सरकार के पास एक महीने से ऐसे अमेरिकियों का बैकलॉग है, जो या तो विदेशी पासपोर्ट पाने के लिए या फिर विदेश से होने वाली कमाई पर टैक्स बचाने के लिए नागरिकता छोड़ना चाहते हैं. इमिग्रेशन फर्म का कहना है कि 2024 में नागरिकता छोड़ने की अपील 48 फीसदी बढ़ गई और 2025 में इसके और बढ़ने की संभावना है.
1935 की महामंदी में दिखा था ऐसा ट्रेंड
इससे पहले 1935 में ऐसा ट्रेंड देखने को मिला था, जब अमेरिका छोड़कर जाने वालों की संख्या वहां विदेश से आने वालों से कहीं ज्यादा थी. 1935 में महामंदी के दौरान बहुत से अमेरिकी सोवियत संघ में काम की तलाश में चले गए थे. फाइनेंशियल डेली ने बताया कि उस वक्त अमेरिका नेट इमिग्रेशन वाला देश बन गया था. ये जनसंख्या के आंकड़ों में भी दर्ज है.













