दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बाद भी 'कंगाल' क्यों रहा वेनेजुएला, सस्ता क्यों बिकता है उसका तेल

दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बाद भी वेनेजुएला की आर्थिक हालत क्यों नहीं सुधरी. दुनिया में सस्ता क्यों बिकता है वेनेजुएला का तेल और अमेरिकी पाबंदियों का क्या हुआ असर.

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नई दिल्ली:

अमेरिकी सुरक्षा बलों ने रविवार तड़के हमले के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी  सिलिया फ्लोरेस को काराकस स्थित उनके आवास से हिरासत में ले लिया. उन्हें अमेरिका ले जाया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक दोनों पर मादक पदार्थ तस्करी और आतंकवाद फैलाने के आरोप हैं. उन्हें आज न्यूयॉर्क की एक अदालत में पेश किया जाना है. वेनेजुएला पर यह कार्रवाई अनेपेक्षित नहीं था. अमेरिका इसकी भूमिका पिछले कुछ समय से बना रहा था. अमेरिकी सुरक्षा बलों ने बीते साल दो सितंबर को वेनेज़ुएला के एक जहाज पर हमला किया था. इस हमले में 11 लोगों की मौत हो गई थी.

करीब 3 करोड़ की आबादी वाले वेनेज़ुएला से अमेरिका के रिश्ते काफी जटिल रहे हैं. वेनेजुएला से अमेरिका के संबंध तेल, राजनीति और सुरक्षा से जुड़े विषयों से प्रभावित रहे हैं.हालांकि ऐसा नहीं है कि अमेरिका वेनेजुएला के रिश्ते हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं. लेकिन दोनों देशों का तनाव वेनेज़ुएला की तेल आधारित अर्थव्यवस्था को लेकर ज्यादा दिखाई देता है. 

दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश

वेनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. एक अनुमान के मुताबिक वेनेज़ुएला के पास 300 अरब बैरल से अधिक का तेल भंडार है. दुनिया में इतना तेल किसी और देश के पास नहीं हैं. तेल भंडार के मामले में वेनेजुएला के बाद सऊदी अरब का नंबर आता है, जिसके पास 267 अरब बैरल का तेल भंडार है. वह इसका दोहन भी कर रहा है.सऊदी अरब के बाद ईरान के पास 208 अरब बैरल का तेल भंडार है.ईरान के बाद सबसे बड़ा तेल भंडार कनाडा के पास है. उसके पास 163 अरब बैरल का तेल भंडार है.ये चारों देश मिलकर दुनिया के आधे से अधिक तेल भंडार रखते हैं.माना जाता है कि दुनिया भर में करीब 1.73 ट्रिलियन बैरल का तेल भंडार है.लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने के बाद भी वेनेजुएला आज तेल निर्यात से पहले के मुकाबले बहुत कम कमाई करता है.

अमेरिकी सुरक्षा बलों ने हमले के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ हिरासत में ले लिया.

वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र कहां हैं?

वेनेज़ुएला का अधिकांश तेल ओरिनोको बेल्ट नामक इलाके में है. यह देश के पूर्वी हिस्से में करीब 55 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.यहां मिलने वाला तेल बहुत भारी (एक्स्ट्रा-हेवी क्रूड) होता है. उसे निकालना और साफ करना आसान काम नहीं है. इसके लिए भाप डालने और हल्के तेल के साथ मिलाने जैसी आधुनिक तकनीकों की जरूरत होती है. इससे तेल की लागत बढ़ जाती है.इसके साथ दिक्कत यह भी है कि  भारी और सल्फर की मात्रा अधिक होने की वजह से वेनेजुएला के तेल को बाजार में अच्छी कीमत नहीं मिलती है.वह आम क्रूड आयल के मुकाबले सस्ते में बिकता है.वेनेजुएला में तेल का सारा काम सरकारी कंपनी पीडीवीएसए करती है.पुरानी मशीनों, निवेश की कमी, गलत प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से वह पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पाती है.

वेनेज़ुएला कितना तेल निर्यात करता है?

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में वेनेज़ुएला ने केवल 4.05 अरब अमेरिकी डॉलर का कच्चा तेल ही निर्यात किया था.उसके मुकाबले में सऊदी अरब ने 181 अरब अमेरिकी डॉलर, अमेरिका नें 125 अरब डॉलर और रूस ने 122 अरब अमेरिकी डॉलर के तेल का निर्यात किया था.

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वेनेजुएला पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) का संस्थापक सदस्य है. वह एक समय अमेरिका को रोज 15–20 लाख बैरल तेल की सप्लाई करता था. लेकिन 1998 में ह्यूगो शावेज के राष्ट्रपति बनने के बाद से यह हालात बदल गए.दरअसल शावेज ने तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया.उन्होंने पीडीवीएसए का ढांचा बदला दिया.उन्होंने राजनीति और घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी. इससे इससे उत्पादन घटता चला गया.शावेज के निधन के बाद राष्ट्रपति बने निकोलस मादुरो भी इस हालात को संभाल नहीं पाए. इसका परिणाम यह हुआ कि हालात और खराब होते चले गए. इसके बाद अमेरिका ने 2017 और 2019 में डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने वेनेजुएला पर कड़ी पाबंदियां लगा दीं. इससे अमेरिका को तेल बेचना लगभग बंद हो गया.उसकी अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग तक पहुंच भी सीमित हो गई. पाबंदियों से परेशान वेनेज़ुएला ने अपना अधिकतर तेल चीन, भारत और क्यूबा को बेचना शुरू किया.

वेनेजुएला में अमेरिकी सुरक्षा बलों की कार्रवाई देखते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

अमेरिकी पाबंदियों का असर

अमेरिकी सरकार ने नवंबर 2022 में अमेरिकी कंपनी शेवरॉन कंपनी को सीमित रूप से वेनेज़ुएला में तेल निकालने और निर्यात की इजाजत दी. लेकिन शर्त यह लगा दी कि इससे होने वाली कमाई सीधे वेनेज़ुएला सरकार को नहीं मिलेगी. जो बाइडन प्रशासन में यह इजाजत जारी रही. लेकिन जनवरी 2025 में दोबारा राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च 2025 में वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले देशों पर 25 फीसदी  अतिरिक्त टैक्स वसूलेगा. इसका मकसद था चीन, रूस और भारत जैसे देशों पर दबाव डालना.इसके बाद भी चीन ने वेनेजुएला से तेल का आयात जारी रखा.इसका परिणाम यह हुआ कि तीन सितंबर 2025 तक वेनेज़ुएला का तेल निर्यात बढ़कर नौ लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो गया. यह पिछले नौ महीनों में सबसे अधिक है. लेकिन यह मात्रा अमेरिकी पाबंदियों से पहले के स्तर से काफी कम है. अमेरिका केवल पाबंदियों तक सीमित नहीं रहा. उसने तीन जनवरी को वह कर दिया, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. इसके बाद से वेनेजुएला के लिए आने वाला समय काफी अनिश्चित है. उसका भविष्य इसी बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी क्या रुख अपनाता है. 

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