ताइवान को 'ब्रह्मास्त्र' देने पर तमतमाया चीन, ट्रंप ने दिए 1 लाख करोड़ के हथियार तो दे दी सीधी चेतावनी

China- Taiwan Tension: ताइवान ने बताया है कि अमेरिका की ट्रंप सरकार ने उसे 11 अरब डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दे दी है. जानिए चीन इससे भड़का हुआ क्यों है.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ताइवान को HIMARS रॉकेट सिस्टम भी बेचेंगे
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  • अमेरिकी सरकार ने ताइवान को 11 अरब डॉलर मूल्य के हथियार बेचने की मंजूरी दी है, जिससे चीन नाराज है
  • चीन ने अमेरिका से एक-चीन सिद्धांत का पालन करने और ताइवान को हथियार देने की कार्रवाई तुरंत रोकने का आग्रह किया
  • अमेरिकी हथियारों में HIMARS रॉकेट सिस्टम, हॉवित्जर, एंटी-टैंक मिसाइल, ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ताइवान पर प्यार लुटा रहे हैं, उसे एक से बढ़कर एक हथियार सौंप रहे हैं और इससे चीन भड़क गया है. दरअसल ताइवान ने गुरुवार, 18 दिसंबर को कहा कि अमेरिकी सरकार ने उसे 11 अरब डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दे दी है. अब इसपर चीन की प्रतिक्रिया आ गई है. चीन ने अमेरिका से कहा कि वह ताइवान को हथियार देना तुरंत बंद करे. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा है, "चीन अमेरिका से एक-चीन सिद्धांत का पालन करने और ताइवान को हथियार देने की खतरनाक कार्रवाइयों को तुरंत रोकने का आग्रह करता है."

अमेरिका ताइवान को देगा ब्रह्मास्त्र!

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार ताइवान के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि अमेरिका की तरफ से मिल रहे हथियारों में HIMARS रॉकेट सिस्टम, हॉवित्जर, एंटी-टैंक मिसाइल, ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण के हिस्से शामिल हैं. डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से यह बड़ा कदम है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी पर वापस लौटने के बाद यह इस तरह की बिक्री का दूसरा बैच है.

अमेरिका से ताइवान को मिल रहे इन हथियारों में HIMARS रॉकेट सिस्टम सबसे खतरनाक है. HIMARS का फुल फॉर्म हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम है. यह ट्रक पर लोड किया गया एक हल्का, मोबाइल, अमेरिका निर्मित रॉकेट लॉन्चर है, जो लंबी दूरी के तीव्र हमलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह हथियार 300+ किमी दूर तक लक्ष्य को मारने और जल्दी से फिर से लोड हो जाने में सक्षम है.

बता दें कि चीन ताइवान को अपना एक अलग हुआ प्रांत मानता है और उसे मुख्य भूमि (मेन लैंड चाइना) के साथ फिर से जोड़ना चाहता है. जबकि ताइवान खुद को एक संप्रभु, स्वतंत्र राष्ट्र कहता है. दोनों के बीच दशकों से तनाव है. अगर अमेरिका की बात करें तो वह ताइवान को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है लेकिन वह इस स्व-शासित द्वीप का सबसे बड़ा सुरक्षा समर्थक भी है. 

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