- चीन ने पहली बार अपने एटलस ड्रोन स्वार्म सिस्टम का पूरा ऑपरेशन सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया है
- इस सिस्टम में एक ऑपरेटर 96 ड्रोन को एक साथ नियंत्रित कर सकता है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है
- ड्रोन सैचुरेशन अटैक, प्रिसिजन स्ट्राइक और डीप स्ट्राइक ऑपरेशन जैसे विभिन्न मिशनों में उपयोग किए जा सकते हैं
चीन ने पहली बार अपने एटलस ड्रोन स्वार्म सिस्टम का पूरा ऑपरेशन सार्वजनिक रूप से दिखाया है. इस सिस्टम के जरिए एक ही ऑपरेटर ने 96 ड्रोन एक साथ कंट्रोल किए. ड्रोन हर 3 सेकंड के इंटरवल पर लॉन्च किए गए, यानी 5 मिनट में 96 ड्रोन लॉन्च हुए. यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस एल्गोरिदम पर आधारित है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है. चीन के ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो एक व्यक्ति 96 ड्रोन को कंट्रोल कर सकता है. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे एक ही धागे से लगभग 100 पतंगें उड़ाई जाएं.
इस ड्रोन सिस्टम के क्या होंगे उपयोग?
इस सिस्टम में अलग-अलग आकार के ड्रोन शामिल हैं. ये ड्रोन मिलकर कई तरह के मिशन को अंजाम दे सकते हैं. जरूरत के हिसाब से मिशन बदला जा सकता है.
- पहला उपयोग है सैचुरेशन अटैक. इसमें बड़ी संख्या में ड्रोन अलग-अलग दिशाओं से हमला करते हैं. इससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ता है. ड्रोन को इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है.
- दूसरा उपयोग है प्रिसिजन स्ट्राइक. पारंपरिक मिसाइलों की सटीकता मौसम और इलेक्ट्रॉनिक बाधाओं से प्रभावित होती है. लेकिन ड्रोन लंबे समय तक टारगेट के ऊपर मंडरा सकते हैं. वे लगातार निगरानी करते हैं. इससे ज्यादा सटीक हमला संभव होता है.
- तीसरा उपयोग है डीप स्ट्राइक ऑपरेशन. ये ड्रोन सैकड़ों से हजारों किलोमीटर तक जा सकते हैं. ये कम ऊंचाई पर उड़ते हैं. इनकी रफ्तार धीमी और रडार सिग्नेचर छोटा होता है. इससे इन्हें पकड़ना मुश्किल होता है. इस तकनीक से दुश्मन के अंदर गहराई तक हमला किया जा सकता है.
AI पर आधारित है यह ड्रोन सिस्टम
इससे युद्ध के पारंपरिक फ्रंटलाइन और बैक एरिया का फर्क कम हो जाता है. तकनीकी रूप से यह सिस्टम AI पर आधारित है. इसमें ड्रोन खुद टारगेट पहचान सकते हैं. वे खुद मिशन प्लान कर सकते हैं. वे अपने रास्ते तय कर सकते हैं. जानकारों के हिसाब से इंसान अकेले इतनी तेजी से ये काम नहीं कर सकता. AI और प्री-ट्रेंड एल्गोरिदम से ड्रोन खुद फैसले लेते हैं. वे बदलती परिस्थितियों के हिसाब से खुद को एडजस्ट भी कर सकते हैं. यह डेमो दिखाता है कि भविष्य का युद्ध अब मशीन और AI पर ज्यादा निर्भर होगा.
भारत के लिए टेंशन वाली बात
यह भारत के लिये काफी चिंता वाली बात हैं. चीन ने जिस तरह से अपने नए ड्रोन सिस्टम एटलस की ताकत दिखाई है. यह सिस्टम बहुत कम समय में बड़ा हमला कर सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य की जंग में ड्रोन अहम होंगे. कम खर्च में ज्यादा असर डालने की क्षमता होती है. दुश्मन को भ्रमित करना भी आसान होता है. हमारे एयर डिफेंस सिस्टम को कन्फयूज कर सकता है. जब एक साथ झुंड में कई ड्रोन से हमला होता है उसे इंटरसैप्ट करना काफी मुश्किल होता हैं. साथ में उसकी स्पीड और छिपने की क्षमता इसे कठिन बनाती है. ये ड्रोन बहुत तेज और छोटे होते हैं. इन्हें रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है. ये खुद टारगेट पहचान सकते हैं. चीन अपनी जरूरत के मुताबिक इसकी तेजी से तैनाती में मदद कर सकता है. यह सिस्टम दुश्मन की सप्लाई लाइन पर भी हमला कर सकता है. सड़क और लॉजिस्टिक्स को निशाना बनाया जा सकता है. कुल मिलाकर देखे तो यह एटलस सिस्टम दिखाता है कि आने वाले समय में युद्ध का चेहरा बदलने वाला है.
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