न वार, न हथियार... बस इस एक चीज से ईरान ने महाशक्ति अमेरिका को कर दिया लाचार

युद्ध छिड़ने से पहले होर्मुज से रोजाना करीब 135 जहाज आते-जाते थे. लेकिन ईरान की नाकाबंदी से 800 से ज्यादा जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं. लगभग 1000 जहाज आसपास के बंदरगाहों पर रास्ता खुलने के इंतजार में खड़े हैं.

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  • मिडिल ईस्ट की जंग ने ईरान के हाथों में ऐसा हथियार थमा दिया है, जो परमाणु बम से भी ज्यादा असरदार है
  • ईरान ने अपनी भू-राजनीतिक ताकत को न सिर्फ पहचाना बल्कि प्रभावी तरीके से इस्तेमाल भी किया
  • होर्मुज की चाबी ईरान के हाथों में होने का ही नतीजा है कि ट्रंप को आखिर वार्ता की मेज पर लौटना पड़ा है
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न मिसाइलों के हमले, न आत्मघाती ड्रोन्स की बारिश और न ही कूटनीति, ईरान ने बस एक दुखती नस दबाई और दुनिया एक तरह से घुटनों पर आ गई. ईरान ने इसी का फायदा उठाया और अमेरिका जैसी महाशक्ति को भी दिखा दिया कि जब बात समंदर की हो तो हर बार सेना और हथियार ही काम नहीं आते. मिडिल ईस्ट की जंग ने ईरान के हाथों में ऐसा हथियार थमा दिया है, जो परमाणु बम से भी असरदार है, ये है होर्मुज. इसी हथियार का इस्तेमाल करके उसने दुनिया में ऊर्जा का सबसे बड़ा संकट पैदा कर दिया और अमेरिका को भी घुटनों पर ला दिया.

ईरान ने फुला दिया दुनिया का दम

40 दिनों की इस जंग में ईरान का सबसे असरदार हथियार होर्मुज ही रहा. अमेरिका और इजरायल मिसाइलों, हवाई हमलों और ड्रोन्स की गिनती में उलझे रहे, वहीं ईरान ने ऐसी चाल चली जिसने आधुनिक युद्ध की परिभाषा ही बदल दी. ईरान ने इस जंग में पहली बार अपनी भू-राजनीतिक ताकत को न सिर्फ पहचाना बल्कि सफलतापूर्वक उसे सबसे प्रभावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल भी किया. उसने होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी करके दुनिया का दम फुला दिया. 

दुनिया की एनर्जी लाइफलाइन- होर्मुज

जैसा कि आप जानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग है. ईरान और ओमान के बीच महज 39 किलोमीटर चौड़े इस समुद्री रास्ते से दुनिया में तेल और गैस का लगभग 20 फीसदी व्यापार होता है. 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमला बोलने के तुरंत बाद से ही ईरान ने इसे बंद कर दिया था. कई जहाजों ने कोशिश की तो ईरान ने हमले करके साफ संदेश दे दिया कि बिना उसकी मर्जी के कोई होर्मुज पार नहीं कर सकता. अमेरिका भी पूरी कोशिश के बावजूद इस समुद्री रास्ते को खुलवाने में नाकाम रहा.

800 से ज्यादा शिप समंदर में अटके 

युद्ध छिड़ने से पहले होर्मुज के रास्ते से रोजाना करीब 135 जहाज तेल-गैस और अन्य सामान लेकर आते-जाते थे. लेकिन ईरान की नाकाबंदी ने शुरुआती दिनों में आवाजाही पूरी तरह ठप कर दी. इसकी वजह से 800 से ज्यादा जहाज फारस की खाड़ी में फंस गए. केप्लर के आंकड़े बताते हैं कि होर्मुज में अभी भी 426 तेल टैंकर, एलपीजी से भरे 34 जहाज और नेचुरल गैस के 19 शिप अटके पड़े हैं. इसके अलावा 1000 से अधिक जहाज आसपास के बंदरगाहों पर रास्ता खुलने के इंतजार में खड़े हैं.

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दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट

होर्मुज पर तालाबंदी ने दुनिया में तेल और गैस का भीषण संकट पैदा कर दिया. न सिर्फ तेल-गैस बल्कि खाद, कृषि उत्पादों और अन्य खनिजों की सप्लाई भी चरमरा गई. दुनिया के तेल उत्पादन का लगभग 20 पर्सेंट और एलएनजी का 25 फीसदी उत्पादन ठप हो गया. तेल और गैस के दाम आसमान छूने लगे. कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट बताया है. IEA के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर फातिह बिरोल ने तो इस संकट को 1973, 1979 और 2022 के संयुक्त संकटों से भी अधिक घातक करार दिया. 

कई देशों की आर्थिक रीढ़ पर चोट

युनाइडेट नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की एक हालिया रिपोर्ट में आकलन किया गया है कि होर्मुज स्ट्रेट  की नाकाबंदी ने क्षेत्र के कई देशों की आर्थिक कमर तोड़ दी है. उनकी संयुक्त जीडीपी में 3.7 से 6 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है. 120 से 194 अरब डॉलर का यह अनुमानित घाटा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2025 में क्षेत्रीय देशों ने जो जीडीपी ग्रोथ हासिल की थी, वो चौपट हो सकती है. न सिर्फ खाड़ी के देश बल्कि दुनिया के तमाम देशों में आर्थिक सुस्ती का खतरा मंडराने लगा था.

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नाकाबंदी से मानवीय संकट गहराया

होर्मुज की नाकाबंदी सिर्फ आर्थिक चोट ही नहीं दे रही थी, बल्कि मानवीय संकट भी पैदा कर दिया था. इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के आंकड़े बताते हैं कि मार्च के आखिर तक 20 हजार से अधिक नौसैनिक बीच समंदर में फंसे हुए थे. ऊर्जा संकट की वजह से क्षेत्रीय देशों में ही 36 लाख नौकरियां खतरे में आ गईं. लगभग 40 लाख लोगों पर गरीबी का खतरा मंडराने लगा. यूएनडीपी का कहना था कि इस महासंकट के कारण क्षेत्रीय देशों को अपनी आर्थिक, वित्तीय, सामाजिक और कूटनीतिक नीतियों में बड़ा फेरबदल करने की नौबत आ रही थी. 

तालाबंदी से ईरान मालामाल

रॉयटर्स का एनालिसिस कहता है कि इस जंग ने अजीबोगरीब स्थिति पैदा कर दी. होर्मुज के बंद होने से इराक और कुवैत जैसे देशों की तेल से कमाई तीन-चौथाई तक घट गई, वहीं ईरान का रेवेन्यू 37 फीसदी और ओमान की कमाई 26 प्रतिशत तक बढ़ गई. तेल की बढ़ी कीमतों ने सऊदी अरब का राजस्व 4.3 प्रतिशत तक बढ़ा दिया. साफ है कि ईरान का ये हथियार बहुत कारगर साबित हुआ. साफ है कि होर्मुज का ताला खोलने की चाबी ईरान के हाथों में होने का ही नतीजा है कि अमेरिका जैसी महाशक्ति को फिर से कूटनीति की मेज पर लौटना पड़ा है. 

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