दुनिया भर में चर्चा के केंद्र बने बोर्ड ऑफ पीस का औपचारिक ऐलान हो गया है. दावोस में विश्व आर्थिक मंच के वार्षिक सम्मेलन के इतर अमेरिकी राष्ट्रपति की अगुआई में इसकी घोषणा हुई. साइनिंग सेरेमनी के दौरान जिस तस्वीर ने ध्यान खींचा, वो थी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ट्रंप के कान में फुसफुसाने की तस्वीर. शहबाज ने अवसर मिलते ही ट्रंप से नजदीकियां बढ़ाने का मौका लपक लिया.
लॉन्चिंग सेरेमनी में करीब 20 देशों के नेता
ट्रंप ने करीब 50-60 देशों को इस बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने के लिए न्योता दिया था. इसका स्थायी सदस्य बनने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे. इस बोर्ड को लेकर प्रमुख देश ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रहे हैं. ट्रंप ने दावा किया कि 59 देशों ने इसके चार्टर पर दस्तखत किए हैं. हालांकि गुरुवार को पहले ग्रुप के अनावरण के दौरान करीब 20 देशों के प्रतिनिधि ही नजर आए. इनमें से ज्यादातर मिडिल ईस्ट के देश हैं. पश्चिमी देशों का प्रतिनिधित्व हासिल करने के लिए ट्रंप को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है.
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सदस्य देशों पर ट्रंप ने ली चुटकी
ट्रंप ने उद्घाटन समारोह में अजरबैजान से लेकर हंगरी और पराग्वे तक के नेताओं और राजनयिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोग हैं. आप में से हर हर कोई मेरा दोस्त है. ट्रंप ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा कि इनमें से अधिकतर बहुत चर्चित नेता हैं, लेकिन कुछ लोकप्रिय भी है, पर राजनीति में ऐसा चलता रहता है.
ट्रंप के कान में फुसफुसाते दिखे शहबाज शरीफ
बोर्ड ऑफ पीस की लॉन्चिंग भाषण के बाद सदस्य देशों के नेताओं ने चार्टर डॉक्युमेंट पर दस्तखत किए. जब पाकिस्तान का नंबर आया तो शहबाज शरीफ साइन करने आए. वह ट्रंप से हाथ मिलाकर उनके कान में फुसफुसाते दिखे. ट्रंप ने भी कान लगाकर उनकी बात सुनी और फिर हाथ और कंधे पर थपथपी दी. दोनों के बीच क्या बात हुई, ये पता नहीं चल पाया है.
पाकिस्तान को मिली पीछे की सीट
गौर करने की बात ये है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज को बोर्ड की लॉन्चिंग समारोह में फ्रंट की सीट नहीं मिली. उन्हें पीछे की सीट पर बिठाया गया था. गाजा में शांति के नाम पर बनाए गए इस बोर्ड में पाकिस्तान को लेकर कई सदस्य पहले ही आशंका जाहिर कर चुके हैं.
पाकिस्तान की सदस्यता को लेकर सहज नहीं
हाल ही में इजरायल के भारतीय दूत रूवेन अजार ने एनडीटीवी से बातचीत करते हुए गाजा में पाकिस्तानी सेना को शामिल करने से साफ इनकार कर दिया था. अजार ने कहा था कि हमास और लश्कर-ए-तैयबा सहित पाकिस्तान की धरती से संचालित होने वाले आतंकवादी समूहों के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर चिंता के कारण इजरायल पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर सहज नहीं है.
बता दें कि इस संगठन की शुरुआत गाजा के पुनर्निर्माण और वहां शांति कायम करने के उद्देश्य से करने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे एक वैश्विक शांति निकाय के रूप में पेश किया जा रहा है. भारत को भी इसका सदस्य बनने का ऑफर दिया गया है. हालांकि अभी तक कुछ आधिकारिक नहीं कहा गया है.
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