- बांग्लादेश में चुनाव से पहले यूनुस सरकार के खिलाफ सहयोगी राजनीतिक दलों ने ही मोर्चा खोल दिया है
- दलों ने आगामी आम चुनावों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए पक्षपात के आरोप लगाए हैं
- दलों का साफ कहना है कि अगर चुनावों में धांधली होती है तो पूरी जिम्मेदारी यूनुस की अंतरिम सरकार की होगी
पड़ोसी देश बांग्लादेश में सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. जिन राजनीतिक दलों के कंधों पर सवार होकर मोहम्मद यूनुस ने सत्ता की कमान संभाली थी, अब उन्हीं दलों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, अंतरिम सरकार पर निष्पक्षता को लेकर आरोप गहराने लगे हैं. पिछली शेख हसीना सरकार को हटाने के लिए एकजुट हुए दलों में आपस में ही तलवारें तन चुकी हैं.
चुनाव से पहले डगमगाया भरोसा
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) जैसे दल जिन्होंने कुछ महीने पहले शेख हसीना सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए एकजुट होकर आंदोलन किया था, उनका यूनुस प्रशासन पर भरोसा डगमगाता दिख रहा है. इन दलों ने चुनाव आयोग कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कड़ी चेतावनी भी जारी कर दी हैं.
चुनाव आयोग पर निष्पक्षता भी सवालों में
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. प्रमुख दलों ने चुनाव आयोग की तटस्थता पर शक जताया है और साफ कहा है कि अगर चुनावों में किसी भी तरह की धांधली या पक्षपात होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मोहम्मद यूनुस की अगुआई वाली अंतरिम सरकार की होगी.
यूनुस को जबावदेह ठहराएंगेः एनसीपी
नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के संयोजक नाहिद इस्लाम के नेतृत्व में सोमवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने मोहम्मद यूनुस से मुलाकात कर अपनी चिंताएं जाहिर कीं. नाहिद इस्लाम ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर प्रशासन और चुनाव आयोग का बर्ताव निष्पक्ष नहीं दिख रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनाव पारदर्शी नहीं हुए तो यूनुस सरकार को जवाबदेह ठहराया जाएगा. एनसीपी ने ये भी आरोप लगाया कि बीएनपी के दबाव में चुनाव आयोग दोहरी नागरिकता रखने वालों और कर्ज न चुकाने वालों को भी चुनाव लड़ने की छूट दे रहा है.
जमात नेताओं का पक्षपात का आरोप
दूसरी तरफ कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहेर की अगुआई में नेताओं ने भी मोहम्मद यूनूस से मुलाकात की और कई एसपी और डिप्टी कमिश्नरों पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायत की. जमात के नेताओं का कहना है कि प्रशासन के कुछ अधिकारी एक खास वर्ग को फायदा पहुंचा रहे हैं जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं.
बीएनपी ने भी लगाए गंभीर आरोप
बीएनपी ने भी पिछले हफ्ते चुनावों में बराबरी का मौका देने का अवसर खत्म करने की कोशिशों का आरोप लगाया था. बीएनपी के प्रवक्ता और पार्टी चेयरमैन के सलाहकार महदी अमीन ने सीधे जमात पर निशाना साधते हुए कहा था कि धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर वोटरों को कुरान की कसम खिलाई जा रही है, जो कि चुनाव नियमों का साफ उल्लंघन है.
सियासी भंवर में फंसे मोहम्मद यूनुस
बांग्लादेश में चुनावी माहौल में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों के बीच जिस तरह से राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता बढ़ रही है, उससे साफ है कि जिस सुधार के वादे के साथ मोहम्मद यूनुस ने कमान संभाली थी, वो अब सियासी भंवर में फंसकर रह है. यूनुस सरकार के लिए अपने ही सहयोगियों को संतुष्ट रख पाना अब मुश्किल होता जा रहा है.













