बांग्लादेश चुनाव प्रचार के दौरान रोहिंग्या कैंप में धुआंधार फायरिंग, 13 साल के बच्चे समेत 5 लोग घायल

Bangladesh Election 2026: 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा तेजी से बढ़ रही है. जनवरी 2026 में दिसंबर 2025 की तुलना में हताहतों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है.

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Bangladesh Election 2026: कॉक्स बाजार के एक रोहिंग्या कैंप की फाइल फोटो

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार के टेकनाफ उपजिला में अली खली रोहिंग्या कैंप इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान अज्ञात हमलावरों की गोलीबारी में एक बच्चे सहित पांच लोग घायल हो गए. स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. यह घटना गुरुवार, 5 फरवरी को रात करीब 8:30 बजे अली खली रोहिंग्या कैंप के कैंप-25 के ब्लॉक ए/04 में हुई. बांग्लादेश के प्रमुख दैनिक ढाका ट्रिब्यून ने बताया कि टेक्नाफ मॉडल पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज (ओसी) मोहम्मद सैफुल इस्लाम ने घटना की पुष्टि की है.

घायलों में दो रोहिंग्या और तीन बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे. चश्मदीदों के मुताबिक, गुरुवार रात अली खली इलाके में एक ट्रक पर चुनाव प्रचार किया जा रहा था. वाहन के पास कई लोग जमा हो गए, तो कुछ हमलावरों ने ट्रक पर गोलीबारी कर दी, जिससे पांच लोग घायल हो गए.

चुनाव से पहले तेजी से बढ़ी राजनीतिक हिंसा

स्थानीय मीडिया ने ढाका स्थित एक मानवाधिकार संगठन के हवाले से बताया कि 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा तेजी से बढ़ रही है. जनवरी 2026 में दिसंबर 2025 की तुलना में हताहतों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है.

संगठन 'ऐन ओ सालिश केंद्र' (एएसके) ने जनवरी में राजनीतिक हिंसा में वृद्धि की जानकारी साझा की। बताया कि 75 घटनाओं में 616 लोग घायल हुए और 11 लोगों की मौत हुई. बांग्लादेश के एक अन्य प्रमुख दैनिक, द डेली स्टार, ने बताया कि यह दिसंबर 2025 में हुई 18 घटनाओं की तुलना में एक बड़ी वृद्धि थी, जिसमें 268 लोग घायल हुए थे और चार की मौत हुई थी.

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निष्कर्षों से पता चला कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और 22 जनवरी को प्रचार शुरू होने के बाद हिंसक गतिविधियों में तेजी आई है. एएसके ने बताया कि 21-31 जनवरी के बीच 49 हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें चार लोग मारे गए, जबकि 414 अन्य घायल हो गए. ये वोटिंग डेट नजदीक आने के साथ स्पष्ट बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है.

अधिकार समूह ने दस्तावेजों के माध्यम से कहा कि बढ़ती राजनीतिक हिंसा के बीच पत्रकारों को भी निशाना बनाया गया है; पिछले साल दिसंबर में 11 पत्रकारों को हमले का सामना करना पड़ा—यह संख्या जनवरी में बढ़कर 16 हो गई. बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए, अधिकार समूह ने राजनीतिक दलों से संयम बरतने और अभियान के दौरान शांति बनाए रखने का आग्रह किया. इसने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से नागरिकों की सुरक्षा करने और उनके संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखने का भी आह्वान किया.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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