- सऊदी अरब ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए 5 नए मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक रूट लॉन्च किए हैं
- ये नए रेल और रोड रूट अरेबियन गल्फ के बंदरगाहों को सऊदी अरब के मध्य और उत्तरी इलाकों से जोड़ेंगे
- ये लॉजिस्टिक कॉरिडोर सऊदी अरब को 2030 तक ग्लोबल लॉजिस्टिक हब बनाने की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं
अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किए जाने से गहराए तेल और गैस के संकट को देखते हुए सऊदी अरब ने बड़ा फैसला किया है. उसने 5 नए लॉजिस्टिक रूट्स लॉन्च करने का ऐलान किया है. रेल और रोड के ये नए रूट न सिर्फ सऊदी अरब को बल्कि कुवैत, यूएई, कतर और बहरीन की भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम करने में मददगार साबित होंगे.
मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनेगा
ये नए रूट मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार करेंगे, जिसमें रोड और रेल ट्रांसपोर्ट भी शामिल होंगे. ये अरेबियन गल्फ के बंदरगाहों को सऊदी अरब के मध्यवर्ती और उत्तरी इलाकों से जोड़ेंगे. इनका विस्तार लाल सागर के बंदरगाहों तक होगा. ये सऊदी अरब के उत्तर में बसे इलाकों तक भी कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे.
होर्मुज पर निर्भरता घटाने की कवायद
अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी कर दी है. इसकी वजह से लगभग 2000 जहाज खाड़ी में फंस गए हैं. ईराक, कुवैत जैसे देशों की तो लगभग पूरी तेल-गैस की सप्लाई ठप हो गई है. सऊदी अरब और यूएई अपनी पाइपलाइनों की बदौलत इस झटके से कुछ हद तक बचने में सफल रहे हैं.
सऊदी अरब के पास लाल सागर का रास्ता
सऊदी अरब के लिए राहत की बात ये है कि वो अपनी सप्लाई के लिए फारस की खाड़ी पर पूरी तरह निर्भर नहीं है. उसके पास लाल सागर का रास्ता भी है, जो होर्मुज से होकर नहीं जाता. इसके जरिए वह तेल और गैस की सप्लाई दुनिया तक पहुंचा सकता है. लेकिन इसमें एक दिक्कत है.
रेल और रोड से बनेगी कनेक्टिविटी
इसी समस्या के समाधान के लिए सऊदी अरब ने माल की ढुलाई के लिए अब लॉजिस्टिक कॉरिडोर शुरू किए हैं. ये मल्टी मॉडल कॉरिडोर हैं. मतलब यहां से रेल और सड़क के रास्ते तेल और गैस को लाल सागर और फारस के खाड़ी से जुड़े बंदरगाहों तक लाया ले जाया जा सकेगा.
ग्लोबल लॉजिस्टिक हब बनेगा सऊदी
ये लॉजिस्टिक कॉरिडोर सऊदी अरब की 2030 तक खुद को ग्लोबल लॉजिस्टिक हब के रूप में स्थापित करने की योजना का हिस्सा हैं. ये पांचों रूट मिलकर इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक सिस्टम बनाएंगे, जिसके जरिए अरेबियन गल्फ के बंदरगाहों को सेंट्रल और नॉर्दर्न हिस्सों से जोड़ा जाएगा, जो आगे लाल सागर के बंदरगाहों तक पहुंचेंगे. इससे सऊदी अरब की सप्लाई चेन सिस्टम काफी मजबूत होने की उम्मीद है.













