- शी जिनपिंग ने चीन के सबसे ताकतवर जनरल झांग यौशिया समेत पूरी मिलिट्री लीडरशिप को हटाकर सेना पर कंट्रोल किया.
- झांग, शी जिनपिंग के लंबे समय से साथी थे और अपने आप में एक पावर सेंटर थे.
- पूरी मिलिट्री लीडरशिप को हटाया जाना 1989 के बाद चीन की सेना की सबसे बड़ी सफाई मानी जा रही है.
चीन की राजनीति और सेना की दुनिया में इस वक्त जबरदस्त हलचल है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी ही सेना के सबसे ताकतवर जनरल झांग यौशिया को अचानक पद से हटा दिया है. यह फैसला चीन की सेना में अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई मानी जा रही है. झांग सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के उपाध्यक्ष थे, जिसके अध्यक्ष खुद शी जिनपिंग हैं. यानी वो शी जिनपिंग के बाद सबसे ताकतवर सैन्य अधिकारी थे, जो अब गंभीर अनुशासनहीनता और कानून उल्लंघन के आरोपों में जांच के घेरे में हैं. चीन के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को इसकी पुष्टि की. इसके साथ ही सेना के जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख रह चुके जनरल ल्यू झेनली को भी इसी तरह के आरोपों में हटाया गया है. चीन में इस तरह की भाषा आमतौर पर भ्रष्टाचार या सत्ता संघर्ष के संकेत मानी जाती है.
महेश जेठमलानी ने लिखा- जिनपिंग ने पूरे मिलिट्री लीडरशिप का हटाया
बीजेपी के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बीजिंग में जो हो रहा है, वह हैरान करने वाला है. शी जिनपिंग ने अपने पूरे मिलिट्री लीडरशिप को हटा दिया है."
उन्होंने लिखा, "चीन अंदर से हिल रहा है. पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के वाइस चेयरमैन झांग यूक्सिया और कई सीनियर जनरलों को हटाए जाने की खबरें किसी असाधारण बात की ओर इशारा करती हैं- यह कोई रूटीन 'भ्रष्टाचार विरोधी' कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह चीन की इंटरनल सिक्योरिटी, डिसिप्लिन वॉचडॉग और स्पेशल सर्विसेज से जुड़ा एक सिक्योरिटी ऑपरेशन है. इसकी शुरुआत एक नाकाम तख्तापलट की साजिश से हुई."
उन्होंने आश्चर्य जताते हुए लिखा, "यह एक नाकाम तख्तापलट की साजिश से शुरू हुआ और शी जिनपिंग को इसके बारे में बमुश्किल दो घंटे पहले पता चला, जो कि चौंकाने वाली बात है."
इसके बाद उन्होंने यह भी बताया कि झांग कोई मामूली आदमी नहीं थे - वह शी जिनपिंग के लंबे समय से साथी थे, अपने आप में एक पावर सेंटर थे, और खबरों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से शी के साथ उनके मतभेद थे.
जेठमलानी लिखते हैं, "अगर ये रिपोर्ट सही हैं, तो यह सालों में चीनी राजनीति में सबसे बड़ा झटका है. चीन के शीर्ष नेताओं के बीच एकता स्वाभाविक नहीं लगती, यह एक थोपी हुई एकता दिखती है जो कमजोर होती है. इतने ऊंची पोस्ट पर लोगों को हटाना इस बात का संकेत है कि अंदरूनी तौर पर वहां कमजोरी है."
तियानमेन स्क्वायर पर 1989 में हुए प्रदर्शन की तस्वीर
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झांग को हटाने की क्या हो सकती है वजह?
झांग को हटाना जाना 1989 के तियानमेन स्क्वायर दमन के बाद से चीनी सेना की सबसे बड़ी फेरबदल घटनाओं में गिना जा रहा है. चीन में सत्ता का असली केंद्र हमेशा सेना को माना गया है. इतिहास गवाह है कि जिसने सेना पर नियंत्रण रखा, वही पार्टी और देश की राजनीति पर हावी रहा. माओ जेदोंग की मौत के बाद देंग शियाओपिंग ने भी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के जरिए ही अपने विरोधियों को किनारे किया था.
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कौन हैं झांग यौशिया?
जानकारों के मुताबिक झांग ही ऐसे व्यक्ति थे जिनके पास इतना सैन्य प्रभाव था कि वे सैद्धांतिक तौर पर शी को चुनौती दे सकते थे. 1979 में चीन-वियतनाम युद्ध के अनुभवी रहे हैं और उन्हें असली युद्ध का अनुभव रखने वाला दुर्लभ जनरल माना जाता था. शी जिनपिंग के पहले की कई सैन्य सफाइयों से वे बचते आए थे और रिटायरमेंट उम्र पार कर भी शीर्ष पद पर बने रहे. माना जा रहा था कि वे 2027 में खुद ही रिटायर हो जाते लेकिन उससे पहले ही उन्हें हटाया जाना शी की जल्दबाजी और सत्ता को पूरी तरह अपने हाथ में लेने की मंशा दिखाता है.
बता दें कि 2023 से शुरू हुई चीन में सैन्य सफाई के दौरान अब तक एयर फोर्स, नेवी और आर्मी के कई बड़े अफसर हटाए जा चुके हैं. यहां तक कि रक्षा मंत्री और हथियार उद्योग से जुड़े दर्जनों अधिकारी भी निशाने पर आए है और इस समय वहां कई पद खाली पड़े हैं. इस कार्रवाई के बाद अब चीन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में शी जिनपिंग के अलावा सिर्फ झांग शेंगमिन बचे हैं जो भ्रष्टाचार जांच एजेंसी के प्रमुख हैं.
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