पश्चिम एशिया में 40 दिन की जंग के बाद युद्धविराम का ऐलान हो चुका है. हालांकि युद्धविराम की शर्तों और इजरायल के लेबनान पर ताजा हमलों को लेकर मतभेद से सीजफायर के लागू होने पर संकट मंडराने लगा है. इस बीच सबकी निगाहें 10 जनवरी को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता पर टिकी हैं. व्हाइट हाउस ने देर रात बयान में बताया कि अमेरिका की तरफ से इस बैठक में कौन-कौन हिस्सा लेगा.
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस्लामाबाद वार्ता के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और दो वार्ताकारों को भेज रहे हैं. वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर भी पाकिस्तान जाएंगे. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी ने बताया कि इस्लामाबाद में स्थानीय समयानुसार शनिवार सुबह पहले राउंड की बैठक होगी. उसके बाद व्यक्तिगत बातचीत की संभावना तलाशी जाएगी.
व्हाइट हाउस ने भले ही इस्लामाबाद वार्ता के लिए अपनी टीम भेजने की घोषणा कर दी है, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि ईरान ने जो 10 सूत्रीय प्लान पेश किया था, उसे ट्रंप ने खारिज करते हुए रद्दी की टोकरी में फेंक दिया है.
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उधर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली पीएम नेतन्याहू ने भी साफ कह दिया है कि दो हफ्ते के सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है. ट्रंप ने इसकी वजह हिज्बुल्ला को बताया है. इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी दोटूक कहा है कि संघर्षविराम में लेबनान शामिल नहीं है. अगर जरूरत पड़ी तो इजरायल फिर से जंग में उतरने के लिए तैयार है. उसकी उंगली ट्रिगर पर है. ईरान से सीजफायर युद्ध का अंत नहीं है. यह सिर्फ इजरायल के उद्देश्य पूरा करने का पहल स्टेप है.
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