- ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों में पिछले दिनों लगातार विरोधाभास देखा गया है
- ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की जंग तो हमने लगभग जीत ली है, फिर अगले दिन कहा कि काम अभी बाकी है
- ईरान में जंग के बीच जमीनी सेना भेजने को लेकर भी डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार अलग-अलग बयान दिए हैं
13 मार्चः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी सेना ईरान के ऊपर बहुत भारी हमला करने वाली है... हम ईरान को पूरी तरह बर्बाद करके छोड़ेंगे. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान में मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकना इतना आसान नहीं होगा. ये तब है, जब एक दिन पहले ही उन्होंने गिनाया था कि अमेरिका ने किस तरह ईरान के सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाया है.
11 मार्चः जंग छिड़ने के बाद से ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर रखा है. खबरें आई थीं कि उसने इस समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं ताकि कोई जहाज उसे पार न कर पाए. हालांकि ट्रंप ने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कोई माइंस लगाई हैं तो हमें उसकी कोई जानकारी नहीं है, लेकिन हम उन्हें हटा देंगे. उन्होंने ये भी कहा कि ईरान को इसकी ऐसी कीमत चुकानी होगी, जिसके बारे में उसने सोचा भी नहीं होगा. ट्रंप के इस बयान के कुछ घंटे बाद ही ईरान ने अमेरिका के तेल टैंकर पर अंडरवॉटर ड्रोन से हमला कर दिया.
10 मार्च: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने खुद ट्रंप के ईरान 'मिशन कंप्लीट' वाले दावे के विपरीत बयान दिया. रक्षा मंत्री हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा कि जंग अभी तेज हो रही है और आज (10 मार्च) का दिन ईरान के लिए सबसे "घातक" साबित होगा. युद्ध खत्म होने को लेकर उनका कहना था कि राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में है.
9 मार्च: इससे एक दिन पहले ट्रंप ने सीबीएस न्यूज पर दावा किया था कि ईरान युद्ध "लगभग पूरा" हो चुका है. उनके बयान का असर था कि होर्मुज में नाकाबंदी के बाद आसमान छू रहे कच्चे तेल के दाम अचानक से गिर गए. हालांकि उसी शाम ट्रंप ने सांसदों से बातचीत में अलग बात कही. उन्होंने कहा कि वह ईरान की धार्मिक लीडरशिप के खिलाफ 'अल्टीमेट जीत' का दबाव बना रहे हैं.
7 मार्च: ट्रंप ने ईरान में जमीनी सेना भेजने के संकेत देते हुए कहा कि उसके एनरिच्ड यूरेनियम भंडारों को सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी सैनिकों को वहां उतरना पड़ सकता है. ये तब है, जब पिछले साल ईरान के कई परमाणु केंद्रों के बाद ट्रंप ने बहुत बड़े नुकसान का दावा किया था.
6 मार्च: ईरान में छिड़ी जंग की आग में पूरे मिडिल ईस्ट के झुलसने के बाद ट्रंप ने कहा था कि युद्ध तभी खत्म होगा, जब ईरान बिना शर्त सरेंडर कर देगा. हालांकि ईरान ने जबाव में सरेंडर तो दूर, उलटे हमले तेज कर दिए. ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि होने के बाद ट्रंप ने इशारों में इच्छा जता दी कि वह ईरान में अगले नेतृत्व के चयन में सीधी भूमिका निभाना चाहता है. लेकिन ईरान ने अयातुल्ला के बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया.
3 मार्च: ट्रंप ने अपने ही विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान को गलत ठहरा दिया, जिसमें उन्होंने संकेतों में कहा था कि इजरायल की वजह से अमेरिका को ईरान युद्ध में कूदना पड़ा. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि युद्ध में जाने का फैसला इजराइल का नहीं, उनका था क्योंकि उन्हें लगा था कि अगर हमने हमला नहीं किया तो ईरान पहले हमला कर देगा.
2 मार्च: जंग के तीसरे दिन ईरान पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक के बीच ट्रंप ने पहली बार कहा कि जरूरी लगा तो अमेरिका अपनी जमीनी सेना को भेजने से नहीं चूकेगा. उन्होंने 4-5 हफ्ते में जंग खत्म करने के पिछले बयान से भी पलटते हुए कहा कि हमारे पास लंबे समय तक लड़ने की ताकत है.
1 मार्च: ईरान पर हवाई हमला शुरू करने के अगले ही दिन ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दावा कर डाला था कि ईरान के खिलाफ यह संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा. उनका कहना था कि मिशन पूरा करने में 4 हफ्ते या उससे भी कम का वक्त लगेगा.
28 फरवरी: इसी दिन अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले शुरु किए थे. ट्रंप ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के 4 प्रमुख लक्ष्य बताए थे- ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता खत्म करना, उसकी नौसेना को नेस्तनाबूद करना, परमाणु हथियारों की आशंका खत्म करना और ईरानी समर्थित समूहों के हमले रोकना. उनका साफ कहना था कि बमबारी तब तक चलेगी, जब तक मिडिल ईस्ट और दुनिया में शांति कायम नहीं हो जाती.













