- अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाते हुए तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किया है
- USS George H.W. Bush को पूर्वी भूमध्य सागर की ओर भेजा गया है, जिससे क्षेत्र में 3 अमेरिकी नौसैनिक जहाज होंगे.
- इजरायल ने ईरान पर व्यापक हमले शुरू किए हैं, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है.
मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से विस्फोटक होते जा रहे हैं. इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए जाने के बीच अमेरिका ने भी सैन्य दबाव बढ़ा दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी क्षेत्र की ओर रवाना कर दिया है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि हालात किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ सकते हैं.
फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर USS George H.W. Bush जल्द ही मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तैनात किया जाएगा. इसके साथ ही इलाके में अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की संख्या तीन हो जाएगी, जो किसी भी संभावित संघर्ष के लिए बड़ी समुद्री ताकत मानी जाती है.
यह भी पढ़ें- युद्ध के बीच 3 ईरानी जहाजों की कहानी: एक अमेरिकी हमले में तबाह, दूसरा भारत और तीसरे ने श्रीलंका में ली पनाह
रिपोर्ट के मुताबिक USS George H.W. Bush को पूर्वी भूमध्य सागर की ओर भेजा जा रहा है. इसी दिशा में USS Gerald R. Ford ने गुरुवार को स्वेज नहर पार कर रेड सी में प्रवेश किया है. इसके अलावा USS Abraham Lincoln पहले से ही क्षेत्र में ऑपरेशनल ड्यूटी पर मौजूद है. ऐसे में तीनों कैरियर समूहों की तैनाती अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी नौसैनिक मौजूदगी मानी जा रही है.
इजरायल ने शुरू किए ‘Extensive Strikes'
उधर इजरायल ने शुक्रवार रात ईरान पर ‘Extensive Strikes' शुरू करने की पुष्टि की है. इन हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की बढ़ती नौसैनिक तैनाती दरअसल ईरान को स्पष्ट संदेश देने की रणनीति है, जिसे वे “full spectrum deterrence” कह रहे हैं.
यह भी पढ़ें- ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें अब 1000 से भी कम, ड्रोन हमले भी घटे... NDTV से बोले यूरेशिया ग्रुप अध्यक्ष
तीसरे अमेरिकी कैरियर का क्या मतलब?
फॉक्स न्यूज के मुताबिक USS George H.W. Bush पर तैनात स्ट्राइक फाइटर जेट और उसके साथ चलने वाले गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर जरूरत पड़ने पर यमन में ईरान समर्थित हौथी ठिकानों को भी निशाना बना सकते हैं. खासकर तब, जब वे इजरायल या अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर हमला करने की कोशिश करें.
तनाव में रेड सी
दरअसल रेड सी और आसपास के समुद्री मार्ग पहले से ही तनाव के केंद्र में रहे हैं, जहां हौथी लगातार गतिविधियां बढ़ा रहे हैं. ऐसे में अमेरिका की यह तैनाती क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार की रक्षा के लिए भी अहम मानी जा रही है.
कुल मिलाकर इजरायल के बड़े हमलों और अमेरिका के तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती ने मिडिल ईस्ट में संघर्ष की आशंका को और गहरा कर दिया है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाली रातें इस पूरे क्षेत्र के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकती हैं.













