- चीन की अदालत ने म्यांमार स्थित स्कैम सिंडिकेट के चार प्रमुख सदस्यों को फांसी की सजा सुनाई है
- ये गिरोह फर्जी प्रेम संबंधों और क्रिप्टोकरेंसी निवेश के जाल में इंटरनेट यूजर्स को फंसाते हैं
- गिरोह ने कई भाषाओं में काम बढ़ाकर हजारों फॉरेन वर्कर्स का इस्तेमाल किया है
चीन की एक अदालत ने सोमवार को बताया कि म्यांमार स्थित स्केम सिंडिकेट के चार प्रमुख सदस्यों को फांसी दी गई है. सीमा पार टेलीकॉम फ्रॉड पर बीजिंग की कड़ी कार्रवाई के तहत एक सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी ऐसी घोषणा है. धोखाधड़ी के ऐसे गिरोह इंटरनेट यूजर्स को फर्जी प्रेम संबंधों और क्रिप्टोकरेंसी निवेशों में फंसाते हैं. ये गिरोह दक्षिण-पूर्व एशिया में कंबोडिया और म्यांमार के अशांत सीमावर्ती क्षेत्रों में फल-फूल रहे हैं.
कैसे करता है ये ग्रुप काम
शुरुआत में मुख्य रूप से चीनी भाषा बोलने वालों को निशाना बनाने वाले इन गिरोहों ने दुनिया भर में अरबों डॉलर की लूटपाट करने के लिए कई भाषाओं में अपना काम बढ़ा लिया है. उन्होंने इन घोटालों को अंजाम देने के लिए हजारों फॉरेन वर्कर्स का इस्तेमाल किया - कुछ को स्वेच्छा से और कुछ वर्कर्स तस्करी करके लाए गए. बीजिंग ने हाल के वर्षों में विदेशी सरकारों के साथ इन पर शिकंजा कसने के लिए सहयोग बढ़ाया है, और हजारों लोगों को चीन की कोर्ट में पेश किया गया है.
मिंग फैमिली से भी फांसी
यह ताजा जानकारी पूर्वी चीनी शहर वेनझोउ की एक अदालत द्वारा टेलीकॉम स्कैम में शामिल "मिंग फैमिली क्रिमिनल ग्रुप" से जुड़े 11 लोगों को फांसी दिए जाने के कुछ दिनों बाद आई है. शेन्ज़ेन मध्यवर्ती जन न्यायालय ने एक बयान में कहा कि जिन चार लोगों को हाल ही में फांसी दी गई है, वे "बाई फैमिली क्रिमिनल ग्रुप" से जुड़े थे. उनके अपराधों में "धोखाधड़ी, जानबूझकर हत्या, जानबूझकर चोट पहुंचाना, अपहरण, जबरन वसूली" और "जबरन वेश्यावृत्ति" शामिल थे. बयान में कहा गया है कि समूह के एक सदस्य, बाई यिंगकैंग ने "लगभग 11 टन मेथम्फेटामाइन की बिक्री और निर्माण में भी मिलीभगत की थी."
एक की बीमारी से मौत
अदालत के अनुसार, इस गिरोह ने उत्तरी म्यांमार के कोकांग क्षेत्र में धोखाधड़ी के अड्डे चलाए, जहां उनकी हरकतों के कारण छह चीनी नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. इन चारों को नवंबर में मौत की सजा सुनाई गई थी. अदालत ने बताया कि मौत की सजा पाए पांचवें व्यक्ति, बाई सुओचेंग की नवंबर के फैसले के बाद "बीमारी से मौत" हो गई. उन पर गिरोह का सरगना होने का आरोप था.














