- ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद राजनीतिक और सैन्य संकट गहराने की आशंका है
- IRGC नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति में कानूनी प्रक्रिया से हटकर जल्द निर्णय चाहता है
- ईरान के संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर का चयन 88 वरिष्ठ धार्मिक विद्वानों वाली विशेषज्ञों की परिषद करती है
ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता को लेकर अभूतपूर्व राजनीतिक और सैन्य संकट खड़ा हो गया है. ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति को लेकर कानूनी प्रक्रिया से हटकर जल्द फैसला चाहता है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि IRGC के भीतर मौजूद शीर्ष कमांड स्ट्रक्चर खामेनेई के उत्तराधिकारी के नाम पर रविवार, 1 मार्च की सुबह तक मुहर लगाने की कोशिश में है. इधर खबरों के अनुसार दिवंगत सर्वोच्च नेता के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता नामित किया जा सकता है.
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों के चलते मौजूदा हालात इतने अस्थिर हैं कि ईरान की संवैधानिक संस्था ‘विशेषज्ञों की परिषद' (Assembly of Experts) की बैठक बुलाना फिलहाल संभव नहीं है.
सुप्रीम लीडर का चयन कौन करता है?
ईरान के संविधान के मुताबिक, सुप्रीम लीडर का चयन 88 वरिष्ठ धार्मिक विद्वानों वाली यही परिषद करती है. यह प्रक्रिया ‘विलायत-ए-फकीह' सिद्धांत पर आधारित है, जिसके तहत केवल किसी बड़े धार्मिक विद्वान (मौलवी) को ही यह पद मिल सकता है. हालांकि, खामेनेई ने अपने जीवनकाल में किसी उत्तराधिकारी का नाम सार्वजनिक रूप से तय नहीं किया था, जिससे चयन और भी जटिल हो गया है.
ईरान इंटरनेशनल के मुताबिक, खामेनेई की मौत के बाद सुरक्षा और सैन्य ढांचे में भ्रम और अव्यवस्था बढ़ गई है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कमांड चेन के कुछ हिस्से टूट चुके हैं, आदेशों के आदान‑प्रदान में दिक्कतें आ रही हैं और फील्ड स्तर पर फैसले लेने में परेशानी हो रही है.
IRGC को किस बात का अंदेशा?
इतना ही नहीं, कई सैन्य कमांडर और निचले स्तर के जवान अपने ठिकानों पर रिपोर्ट करने से भी हिचक रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि उन्हें डर है कि अमेरिकी और इज़राइली हमलों का अगला निशाना सैन्य और कमांड सेंटर्स हो सकते हैं.
इस बीच, IRGC को यह भी आशंका सता रही है कि जैसे ही रविवार को दिन निकलेगा, देश के अलग‑अलग हिस्सों में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं, जिससे एक नई विरोध लहर शुरू हो सकती है.
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, फिलहाल ईरान में ऐसा कोई नेता नहीं है जिसके पास खामेनेई जैसी धार्मिक और राजनीतिक ऑथोरिटी हो. ऐसे में जो भी अगला सुप्रीम लीडर बनेगा, उसके लिए IRGC और शक्तिशाली धार्मिक संस्थानों पर नियंत्रण स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी.
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