- अफगानिस्तान ने कुनार नदी पर जल्द बांध बनाकर पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को रोकने का निर्णय लिया है
- तालिबान के जल मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान को अपने जल संसाधनों के प्रबंधन का पूरा अधिकार है
- कुनार नदी की लंबाई लगभग 500 किलोमीटर है और यह पाकिस्तान के पंजाब में सिंधु नदी से मिलती है
भारत के सिंधु नदी समझौता रद्द करने के फैसले से अभी पाकिस्तान संभला भी नहीं था कि अफगानिस्तान ने उसकी टेंशन और बढ़ा दी है. दरअसल, अफगानिस्तान ने इस सप्ताह कुनार नदी पर "जितनी जल्दी हो सके" बांध बनाकर पाकिस्तान की तरफ जाने वाले पानी को रोकने का फैसला किया है. कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान ने ये कदम बीते कुछ दिनों से सीमा पर पाकिस्तान से जारी संघर्ष को देखते हुए लिया है.अफगानिस्तान के कार्यवाहक जल मंत्री मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि यह आदेश सत्तारूढ़ तालिबान के सर्वोच्च नेता मावलवी हिबतुल्ला अखुंदजादा की ओर से आया है.
नदियों और नहरों पर अपना अधिकार जता रहा तालिबान
अगस्त 2021 में अफगान सरकार पर कब्ज़ा करने के बाद से, तालिबान ने अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांधों और नहरों का निर्माण करके, देश के माध्यम से बहने वाली नदियों और नहरों पर अपना अधिकार स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया है. इसमें पश्चिम से मध्य एशिया में बहने वाली नदियां भी शामिल हैं.इसका एक उदाहरण उत्तरी अफगानिस्तान में बनाई जा रही विवादास्पद कोश टेपा नहर है. 285 किमी की दूरी पर स्थित, इससे 550,000 हेक्टेयर से अधिक के शुष्क विस्तार को व्यवहार्य कृषि भूमि में बदलने की उम्मीद है.
विशेषज्ञों ने कहा है कि नहर एक अन्य नदी, अमु दरिया के 21 प्रतिशत हिस्से को मोड़ सकती है, और बदले में, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे पहले से ही पानी की कमी वाले देशों को प्रभावित कर सकती है. पिछले हफ्ते तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी औपचारिक यात्रा पर भारत में थे, इस दौरान उन्होंने हेरात प्रांत में एक बांध के निर्माण और रखरखाव के लिए समर्थन की सराहना की.














