- अमेरिका के पूर्व NSA जनरल माइक फ्लिन ने चीन से ईरान को मिसाइल सप्लाई के दावे को युद्ध छेड़ने जैसा बताया है
- फ्लिन ने अमेरिका को चीन को कड़ी चेतावनी देने और चीनी छात्रों पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाने का सुझाव दिया है
- फ्लिन ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर बोले कि मिसाइलें भेजने वाला देश ईमानदार मध्यस्थ कैसे हो सकता है
अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान ने मध्यस्थता की. लेकिन अब इस मध्यस्थता पर ही संदेह के बादल मंडराने लगे हैं. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जनरल माइक फ्लिन के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है. जनरल माइक फ्लिन ने उन रिपोर्ट्स पर चिंता जताई है जिनमें दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर हमला करने के लिए जिन चीनी मिसाइलों का इस्तेमाल किया, वे पाकिस्तान के रास्ते भेजी गई थीं.
'यह युद्ध छेड़ने जैसा है'
जनरल फ्लिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मोसाद कमेंट्री की एक रिपोर्ट का जवाब देते हुए इसे बेहद गंभीर मामला बताया. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान ने जिस अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाने के लिए मिसाइलों का इस्तेमाल किया था, वे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा दी गई थीं और पाकिस्तान के रास्ते भेजी गई थीं. फ्लिन ने कहा कि अगर यह सच है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पाकिस्तान के जरिए ईरान को मिसाइलें सप्लाई कर रही है, तो यह एक्ट ऑफ वार यानी युद्ध छेड़ने जैसा है.
फ्लिन ने सुझाव दिया कि अमेरिका को तुरंत चीन को चेतावनी देनी चाहिए और अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले 5 लाख चीनी छात्रों पर प्रतिबंध जैसे कड़े कदम उठाने चाहिए. फ्लिन ने पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच की जा रही मध्यस्थता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान के रास्ते मिसाइलें भेजी जा रही हैं, तो यह उसे एक 'ईमानदार मध्यस्थ' कैसे बनाता है? किसी को तो हकीकत का सामना करना ही होगा.'
ISW का खुलासा, चीन बना ईरान का 'मिसाइल बैकअप'
अमेरिकी मिलिट्री थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) ने भी इन दावों की पुष्टि की है. ISW के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से चीन ने कई बार ईरान को मिसाइल फ्यूल बनाने का कच्चा माल भेजा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान उन भूमिगत मिसाइल बंकरों और साइलो को फिर से खोदकर निकाल रहा है जिन्हें अमेरिका और इजरायल ने नष्ट किया था. कुछ मामलों में तो हमलों के चंद घंटों बाद ही उन्हें फिर से चालू कर दिया गया.
(ANI के इनपुट के साथ)
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