रवीश उवाच : गांधी के आदर्श कितने प्रासंगिक?

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  • प्रकाशित: जनवरी 30, 2014
इसलिए नहीं कि आज के दिन गांधी की हत्या हुई थी, इसलिए नहीं कि आज भी कई लोग इस हत्या को जायज़ मानते हुए घूमते रहते हैं, इसलिए भी नहीं कि हमने कभी गांधी की मौत को लेकर गहरा पश्चाताप नहीं किया। बल्कि इसलिए कि हमारे बहुत सारे मोहल्ले, शहर, पुल, मूर्तियां, संग्रहालय, स्कूल, कालेज और बाज़ार गांधी के नाम पर बने हैं।

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