Twisha Sharma death case: ट्वीशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब और भी संवेदनशील और जटिल होता जा रहा है. भोपाल AIIMS की मोर्चरी में पिछले 7 दिनों से पड़ा ट्वीशा का शव अब न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन गया है. परिवार ने साफ कर दिया है कि जब तक दूसरा पोस्टमार्टम नहीं होगा और केस दिल्ली ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. ट्वीशा की मां रेखा शर्मा ने कोर्ट परिसर से ही अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें स्थानीय प्रशासन और जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है. उनका आरोप है कि उनकी बेटी को ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित किया गया और उसकी हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जा रही है.
परिवार का कहना है कि मौत से कुछ दिन पहले और घटना से कुछ घंटे पहले तक ट्वीशा लगातार अपनी मां से संपर्क में थी और मदद मांग रही थी. आखिरी बातचीत में वह रो रही थी और कहा था कि उसे मारा जा रहा है. इसके अलावा कई चैट्स भी सामने आई हैं, जिनमें उसने साफ लिखा था कि “मुझे ले जाओ, ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे.” रेखा शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी महज 5 महीने पहले शादी करके भोपाल आई थी, लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद से वह मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान रहने लगी थी. परिवार का आरोप है कि पति समर्थ सिंह उस पर शक करता था, उसे अपमानित करता था और यहां तक कि उस पर चरित्र को लेकर भी सवाल उठाता था.
इतना ही नहीं, परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि ट्वीशा का जबरन गर्भपात कराया गया और उसके पति पर नशे का भी शक जताया गया. परिवार के मुताबिक, अगर ससुराल पक्ष उसे आर्थिक रूप से सपोर्ट करता था तो फिर वह अपने माता-पिता से छोटी-छोटी रकम क्यों मांगती थी, इसका जवाब नहीं मिलता.
घटना के बाद भी परिजनों ने ससुराल वालों के रवैये पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ट्वीशा को अस्पताल में छोड़कर आरोपी मौके से चले गए और बाद में भी परिवार से कोई संपर्क नहीं किया. इस बीच ट्वीशा की सास, जो रिटायर्ड जज हैं, को अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि पति समर्थ सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई जारी है.
परिवार को डर है कि आरोपी पक्ष न्यायिक प्रणाली से जुड़ा होने के कारण जांच को प्रभावित कर सकता है. यही वजह है कि वे मामले की सुनवाई दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने और दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं. मां रेखा शर्मा ने भावुक अपील करते हुए कहा, “हमें कुछ नहीं चाहिए, बस मेरी बेटी को न्याय मिलना चाहिए.” अब यह मामला सिर्फ एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि न्याय की एक लंबी लड़ाई बन चुका है, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है.