नई दिल्ली: एनडीटीवी के शो चक्रव्यूह में बीजेपी नेता संगीत सोम और एंकर के बीच एक लंबी और तीखी बहस देखने को मिली. एंकर ने सबसे पहले संगीत सोम से पूछा कि क्या बीजेपी को मुसलमानों के वोट नहीं चाहिए, क्योंकि बंगाल और असम जैसे चुनावी राज्यों में पार्टी के नेता मुस्लिम समुदाय से वोट मांगते हैं। इस पर संगीत सोम ने कहा, “जो यह सोचता है कि मुसलमान बीजेपी को वोट देगा, वह गलतफहमी में है.” इस बयान पर एंकर ने सवाल उठाया कि क्या इससे मुसलमानों को एक अलग धड़े के रूप में देखा जा रहा है.
भारत‑पाक मैच और आतंकवाद पर आमने‑सामने
भारत‑पाकिस्तान क्रिकेट मैच का मुद्दा उठाते हुए एंकर ने कहा कि क्या सभी मुसलमान उसी नजर से देखे जाते हैं जो भारत‑पाक मैच में पाकिस्तान की जीत पर जश्न मनाते हैं. संगीत सोम ने जवाब दिया कि, “जब तक पाकिस्तान आतंकवाद नहीं छोड़ता, तब तक उसके साथ न मैच होना चाहिए और न कोई डील.”
जब उनसे उनके पुराने बयान- “हर आतंकी मुसलमान होता है”- को लेकर सवाल किया गया, तो संगीत सोम ने कहा कि उनके बयान को तोड़‑मरोड़ कर पेश किया गया और उन्होंने कहा था कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि ज़्यादातर आतंकी मुस्लिम क्यों होते हैं.
‘नफरत फैलाने’ के आरोपों पर जवाब
एंकर ने आरोप लगाया कि उनके बयानों से मुसलमानों के प्रति नफरत झलकती है. इस पर संगीत सोम ने साफ कहा, “मेरे भीतर किसी समुदाय के प्रति नफरत नहीं है.” उन्होंने एक पुराने विवादित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि मीडिया अक्सर बयान का एक हिस्सा दिखाकर पूरा संदर्भ छिपा देती है.
मस्जिद‑मंदिर विवाद और कोर्ट पर बयान
कार्यक्रम में सबसे तीखी बहस तब हुई जब काशी‑मथुरा और ज्ञानवापी का मुद्दा सामने आया. एंकर ने 19 मार्च 2025 के उनके बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि काशी‑मथुरा के लिए कोर्ट का सहारा नहीं लिया जाएगा और विध्वंस किया जाएगा. इस पर संगीत सोम ने तर्क दिया कि जब ऐतिहासिक रूप से मंदिर तोड़कर मस्जिदें बनाई गई थीं तब किसी अदालत का सहारा नहीं लिया गया था. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को मानते हैं, तो उन्होंने कहा कि वह संविधान और न्यायपालिका में विश्वास रखते हैं.
‘जनभावना बनाम कानून’ की बहस
एंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि अदालतें भावनाओं के नहीं, तथ्यों और कानून के आधार पर फैसले देती हैं. इस पर संगीत सोम ने जोर दिया कि देश की जनता की भावना को भी समझना होगा. उन्होंने राम मंदिर फैसले का उदाहरण देते हुए कहा कि जो कभी काल्पनिक बताया जाता था, वही आज न्यायालय द्वारा स्वीकार किया गया.
भड़काने के आरोप और ‘गीदड़ भभकी’ पर सवाल
एंकर ने सवाल किया कि क्या ऐसे बयानों से लोगों को कानून अपने हाथ में लेने के लिए उकसाया जा रहा है. उन्होंने पूछा कि अगर करने का इरादा है तो खुलकर कब करेंगे, वरना ऐसे बयान सिर्फ “गीदड़ भभकी” क्यों लगते हैं. संभल मस्जिद विवाद पर संगीत सोम ने कहा कि कार्रवाई अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन ने की थी, न कि किसी व्यक्ति या संगठन ने.