पटना/मोकामा: बिहार के बाहुबली नेता और मोकामा से विधायक अनंत सिंह सोमवार को चार महीने बाद पटना की बेउर जेल से रिहा हो गए. जेल से बाहर निकलते ही उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल दिखा. बेउर जेल के बाहर जैसे ही अनंत सिंह नजर आए, वहां मौजूद समर्थकों ने स्वागत किया और पहली तस्वीरें सामने आईं.
जेल से रिहाई के बाद अनंत सिंह सीधे ₹30 लाख की लैंड क्रूजर में सवार होकर अपने पटना स्थित आवास के लिए रवाना हुए. उनके साथ करीब 50 गाड़ियों का काफिला चला. आवास पहुंचने पर समर्थकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा, जिससे कुछ देर तक गेट पर प्रवेश भी मुश्किल हो गया.
फूलों से सजा आवास, ढोल‑नगाड़ों और आतिशबाजी से स्वागत
अनंत सिंह के आवास को पहले से ही गेंदे के फूलों से सजाया गया था. जगह‑जगह पंडाल लगाए गए थे और करीब एक हजार कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी. जैसे ही अनंत सिंह अपने घर पहुंचे, ढोल‑नगाड़े बजे, पटाखे फूटे और समर्थकों ने जमकर आतिशबाजी की. हर हाथ में मोबाइल था और हर समर्थक अपने नेता की एक झलक पाने के लिए उतावला दिखा. बाढ़, बड़हिया और मोकामा से बड़ी संख्या में समर्थक पटना पहुंचे थे. घर परिसर में लगातार “छोटे सरकार की जय” के नारे गूंजते रहे.
2–3 लाख रसगुल्ले, समोसे और 10 तरह के व्यंजन
अनंत सिंह की रिहाई के मौके पर उनके आवास पर भव्य आयोजन किया गया. समर्थकों के लिए नाश्ते और खाने का खास इंतजाम था. जानकारी के मुताबिक, इस मौके पर 2 से 3 लाख रसगुल्ले तैयार किए गए, जो बाढ़ से बनकर पटना लाए गए. इसके अलावा हजारों समोसे बनाए गए. खाने में करीब 10 प्रकार के व्यंजन शामिल थे, जिनमें पूरी‑सब्जी, पुलाव, दाल और दो तरह की सब्जियां थीं.
इन तैयारियों के लिए करीब 40 लोग एक दिन पहले से लगे हुए थे और पिछले 24 घंटे से रसोई में चूल्हा जल रहा था. गर्मी को देखते हुए पंडाल में बड़े‑बड़े पंखे और कूलर भी लगाए गए थे. चाय‑कॉफी की व्यवस्था दिनभर नॉन‑स्टॉप चलती रही.
चुनाव नहीं लड़ने के ऐलान के बावजूद समर्थकों में जोश
यह पूरा जश्न ऐसे समय हुआ है जब अनंत सिंह पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे आगामी चुनाव नहीं लड़ेंगे. इसके बावजूद समर्थकों का उत्साह कम नहीं दिखा. समर्थकों का कहना है कि “नेता भले चुनाव न लड़ें, लेकिन मोकामा की राजनीति में उनका कद और प्रभाव बना रहेगा.”
हाई कोर्ट से मिली जमानत
अनंत सिंह को दुलार चंद यादव हत्याकांड में पटना हाई कोर्ट से जमानत मिली है. चुनाव प्रचार के दौरान हुई इस हत्या के मामले में 1 नवंबर को उनकी गिरफ्तारी हुई थी. जेल में रहते हुए भी अनंत सिंह ने मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीता था.
रिहाई के बाद समर्थकों ने इसे “सत्य की जीत” और “न्यायालय पर भरोसे का नतीजा” बताया. समर्थकों का कहना है कि उन्हें विश्वास था कि उनके नेता को न्याय जरूर मिलेगा.