सोनीपत के एक वृद्ध आश्रम से सामने आई यह भावुक कहानी पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर रही है। कभी बड़े कपड़ा व्यापारी रहे शिवचरण रतन गुप्ता ने अपनी तीन बेटियों को पढ़ाया-लिखाया और कामयाब बनाया। लेकिन लंबी बीमारी और मृत्यु के बाद भी बेटियां अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंचीं। आश्रम के लोगों ने अंतिम संस्कार किया। आखिर यह मामला हमें रिश्तों, संस्कारों और बदलते सामाजिक मूल्यों के बारे में क्या सोचने पर मजबूर करता है? इस वीडियो में पूरी कहानी और उससे जुड़े बड़े सवाल।