रवीश कुमार का प्राइम टाइम: अलविदा इरफ़ान और भगोड़ों को कर्ज़ माफ़ी की क्या है राजनीति

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  • प्रकाशित: अप्रैल 29, 2020
अब हमारे हिस्से में इंतजार ही है, इरफान नहीं हैं. एक अच्छा कलाकार जब चला जाता है तो उसके अभिनय की अच्छाई बहुत याद आती है.साल 2013 में एक फिल्म आयी थी लंचबॉक्स इरफ़ान चाहते थे कि फिल्म आने से पहले ही समीक्षक इस फिल्म को देख लें. उन्हें अपनी फिल्म और अपनी अभिनय पर इतना भरोसा था कि बहुत लोगों को आमंत्रित किया गया. वहीं पर हमें यह लंचबॉक्स मिला था. तब से यह लंचबॉक्स जाने कहां गुम हो गया था लेकिन आज यह निकल आया. लंचबॉक्स फिल्म में फर्नाडिस का किरदार सबको याद होगा जिसने भी यह फिल्म देखा होगा. कैसे एक लंचबॉक्स फर्नाडिस के पास चला आता है वो लंचबॉक्स ईला का होता है और उसके जरिए दोनों बात करने लगते हैं. मुंबई शहर को फिर से देखने और समझने लगते हैं. 53-54 साल की जिंदगी रही इरफ़ान की लेकिन उनकी अभिनय की जिंदगी बहुत बड़ी थी. इतनी बड़ी कि Tv बहुत छोटी जगह है बात करने के लिए.

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