पेपर लीक के खिलाफ हुए जैन जी आंदोलन को खत्म हुए हफ्ते भर से ज्यादा हो चुका है. कानून में संशोधन बिल संसद से पास हो गया है, लेकिन अब राजनीति उसी आंदोलन और आंदोलनकारियों को निशाना बना रही है. सबसे ताजा विवाद बीजेपी नेता और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी के बयान से शुरू हुआ. दिल्ली के तुगलकाबाद ग्राउंड में जैन जी सम्मेलन के दौरान उन्होंने जंतर-मंतर के प्रदर्शन को लेकर कहा कि वहां 'पंक्चर लगाने वाले और ताला बनाने वाले ज्यादा थे, छात्र कम थे' और 'वो पंक्चर लगाने वालों की ही औलादें होंगी'. सवाल उठता है कि क्या किसी पिता का पेशा उसके बच्चे के सपनों पर पाबंदी लगा देता है? क्या गरीब परिवार का बच्चा मेधा और शिक्षा का हकदार नहीं है? यह सिर्फ बिधूड़ी तक सीमित नहीं है. कुछ दिन पहले कंगना रनौत ने भी प्रदर्शनकारी युवाओं को 'जनरेशन गटर' कहा था. ऐसे बयान तब आते हैं, जब सरकार और बीजेपी खुद युवाओं को इंस्टा रील्स, युवा संवाद और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने में जुटी है. पीएम मोदी खुद युवाओं को 'देश का भविष्य' और 'फ्रेंड्स' कहते हैं.