नोएडा पुलिस की जांच में पता चला है कि हिंसा भड़काने के लिए फर्जी वीडियो के ज़रिये अफवाह फैलाने की साजिश रची गई थी. 14 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल किया गया, जिसे नोएडा का बताकर पुलिस मारपीट और हड़ताल का झूठा दावा किया गया.
जांच में सामने आया है कि वायरल वीडियो नोएडा का नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के शहडोल–रीवा इलाके का पुराना वीडियो है, जिसमें नशे में एक व्यक्ति हंगामा कर रहा था. इस वीडियो को अलग‑अलग कैप्शन के साथ एक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा कर लोगों में डर और गुस्सा पैदा करने की कोशिश की गई.
नोएडा पुलिस के अनुसार, इन्हीं भ्रामक वीडियो के बाद इलाके में हिंसा भड़की, जिसमें बसों, वाहनों और फैक्ट्रियों को नुकसान पहुंचा और कई पुलिसकर्मी घायल हुए. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में लिया.
मामले में कई सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. जांच के दौरान राजनीतिक कनेक्शन भी सामने आया है और पुलिस ने दो राजनीतिक प्रवक्ताओं के खिलाफ फर्जी वीडियो शेयर करने के आरोप में केस दर्ज किया है. पुलिस इस पूरे मामले को सुनियोजित साजिश के एंगल से जांच रही है.
अब तक नोएडा हिंसा के मामले में 396 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें कथित तौर पर कुछ मुख्य साजिशकर्ता भी शामिल हैं. पुलिस अन्य संदिग्धों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भी जांच कर रही है.
इस वीडियो में नोएडा से NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट और पुलिस जांच में सामने आए पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताया गया है.