नोएडा में प्रदर्शन कर रहे प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों ने अपनी सैलरी स्लिप को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. मजदूरों का कहना है कि कागज़ों में उन्हें ₹13,580 की मासिक सैलरी दिखाई जाती है, लेकिन अलग-अलग मदों में कटौती के बाद उनके हाथ में बेहद कम रकम पहुंचती है.
प्रदर्शन कर रहे एक मजदूर ने बताया कि कुल सैलरी ₹13,580 दिखाई जाती है, लेकिन उसमें से करीब ₹4,000 की कटौती कर ली जाती है. इसके बाद जो रकम बचती है, वही असली तनख्वाह के तौर पर दी जाती है. मजदूर के मुताबिक, मासिक वेतन का जो मूल वेतन होना चाहिए, वह सिर्फ ₹9,483 के आसपास बनता है. वहीं, हाथ में मिलने वाली सैलरी और भी कम होकर करीब ₹9,300 रह जाती है. कुछ मामलों में तो कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सैलरी में बढ़ोतरी ₹300 से भी कम होती है.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सैलरी स्लिप में अलग-अलग भत्ते जोड़कर कुल रकम ज्यादा दिखाई जाती है, लेकिन कटौती के बाद वास्तविक वेतन बेहद कम रह जाता है. मजदूरों का कहना है कि उन्हें न तो सही तरीके से ओवरटाइम का भुगतान मिलता है और न ही सैलरी स्ट्रक्चर की स्पष्ट जानकारी दी जाती है.
कर्मचारियों का दावा है कि इसी तरह की सैलरी व्यवस्था और आर्थिक दबाव के चलते वे प्रदर्शन करने को मजबूर हुए. उनका कहना है कि जब तक पारदर्शी वेतन प्रणाली और पूरा भुगतान सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.