NDTV Creators' Manch Season 2 में शामे शायराना – उर्दू शायरी की शानदार महफिल! मशहर अफरीदी की दिलनशीं ग़ज़लें ("जमी पर घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं", "उसी को सोच रहा था उसे भुलाते हुए"), इकबाल अशर की भावुक नज़्म ("वृद्ध आश्रम से बाप का खत", "पढ़े थे प्रेम के बस 2.5 अक्षर"), पॉपुलर मेरठी का व्यंग्यपूर्ण हास्य ("चलो दिलदार चलो चाँद के पार"), वसीम बरेलवी की गहरी शायरी ("ये कब्रिस्तान है बेखौफ रहिए", "खुशियाँ देते देते खुद गम में मर जाते हैं")।