सिर्फ 30 मिनट का नोटिस, फिर बरसी गोलियां... काफर कासिम गांव की दिल दहला देने वाली कहानी

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  • प्रकाशित: अक्टूबर 31, 2026


तारीख थी 29 अक्टूबर 1956. हर सुबह की तरह काफर कासिम गांव में रहने वाले फिलिस्तीनी किसान अपने-अपने खेतों के लिए निकल गए थे. उसमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे, सब शामिल थे. उन्हें नहीं पता था कि उनमें से कुछ कभी वापस गांव नहीं लौटेंगे. इजरायल की स्थापना के 8 साल बीत चुके थे. जो फिलिस्तीनी अपनी जमीन पर ही रह गए थे, वे इजरायली सैन्य शासन के अधीन जी रहे थे. इस शासन ने उनकी आवाजाही पर कई पाबंदियां लगा रखी थीं, जिनमें परमिट सिस्टम और कर्फ्यू शामिल थे. उस दिन, जब मिस्र के खिलाफ युद्ध की तैयारियां चल रही थीं, तो दूसरी बॉर्डर पुलिस बटालियन के कमांडर शमुएल मालिनके को कई फिलिस्तीनी गांवों में कर्फ्यू लगाने का आदेश मिला. इसमें काफर कासिम गांव भी शामिल था. (AI GENERATED on one side सोर्स- फ़िलिस्तीनी दूतावास)