पश्चिमी एशिया में युद्ध के 31 दिन पूरे, 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात
USS ट्रिपोली की एंट्री से जमीनी जंग के संकेत, ईरान की खुली धमकी
पश्चिमी एशिया में चल रहे भीषण युद्ध को अब 31 दिन पूरे हो चुके हैं और हालात लगातार ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं. इस बीच न्यूयॉर्क टाइम्स की एक अहम रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने बीते एक महीने में युद्ध क्षेत्र में अपने सैनिकों की संख्या तेजी से बढ़ाकर 50,000 से ज्यादा कर दी है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि सिर्फ पिछले एक महीने में ही करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक वेस्ट एशिया भेजे गए हैं.
सीजफायर के पीछे सैन्य रणनीति?
बीते दिनों डोनाल्ड ट्रम्प ने 10 दिन के युद्धविराम की घोषणा की थी, लेकिन ईरान लगातार आरोप लगाता रहा है कि इस बातचीत और सीजफायर के पीछे अमेरिका की कोई गुप्त सैन्य रणनीति छिपी हो सकती है. अब सामने आई तस्वीरें और आंकड़े ईरान के इस दावे की पुष्टि करते नजर आ रहे हैं. अमेरिका लगातार एयरबोर्न डिवीजन, मरीन और स्पेशल फोर्स के सैनिकों को आगे बढ़ा रहा है, जिससे सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका किसी बड़े जमीनी सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में है।
USS ट्रिपोली की तैनाती, जमीनी हमले का संकेत?
सबसे बड़ा संकेत USS ट्रिपोली की तैनाती से मिल रहा है। अमेरिका का यह अत्याधुनिक एम्फीबियस असॉल्ट शिप अब मिडिल ईस्ट के US Central Command ऑपरेशन ज़ोन में पहुंच चुका है। सेंटकॉम के मुताबिक, USS ट्रिपोली पर सवार मरीन और नौसैनिक 27 मार्च को युद्ध क्षेत्र में पहुंच गए थे।
तस्वीरों में अमेरिकी मरीन कॉम्बैट यूनिफॉर्म, हेलमेट और गॉगल्स के साथ पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं। ये मरीन पहले से तैनात 50,000 अमेरिकी सैनिकों की टुकड़ी में शामिल हो चुके हैं। यह पिछले 20 सालों में मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती मानी जा रही है।
USS ट्रिपोली क्यों है इतना खतरनाक?
USS ट्रिपोली कोई साधारण युद्धपोत नहीं है। यह एक ऐसा जहाज है जो समंदर से सीधे जमीन पर हमला करने में सक्षम है। इसे “लाइटनिंग कैरियर” भी कहा जाता है क्योंकि इस पर करीब 20 अत्याधुनिक F-35B स्टील्थ फाइटर जेट तैनात हैं। ये पांचवीं पीढ़ी के मल्टी‑रोल फाइटर हैं, जो हवा, जमीन और समुद्र—तीनों मोर्चों पर हमला कर सकते हैं।
इसके अलावा USS ट्रिपोली पर:
MV‑22 Osprey टिल्ट‑रोटर एयरक्राफ्ट
MH‑60S Seahawk हेलिकॉप्टर
हेलफायर मिसाइल सिस्टम
और करीब 300 स्पेशल मरीन कमांडोज
मौजूद हैं। ये कमांडोज 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट का हिस्सा हैं, जिन्हें दुनिया की सबसे खतरनाक स्पेशल फोर्स यूनिट्स में गिना जाता है। ये जवान सर्जिकल स्ट्राइक, समुद्री घुसपैठ और तटीय इलाकों में युद्ध के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
खार्ग द्वीप पर हमले की आशंका
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि USS ट्रिपोली की तैनाती सीधे तौर पर ईरान के खार्ग द्वीप की ओर इशारा कर रही है। यही वह द्वीप है, जहां से ईरान अपने करीब 90% तेल का निर्यात करता है। अगर अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा करता है, तो इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगेगा और युद्ध में उसकी स्थिति कमजोर हो सकती है। USS ट्रिपोली के साथ अमेरिका USS बॉक्सर और अन्य नेवी यूनिट्स को भी बैकअप के तौर पर तैनात कर रहा है।
ट्रम्प के बयानों से बढ़ी चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि ईरान में कई बड़े ठिकानों को “निष्क्रिय कर नष्ट” कर दिया गया है। उन्होंने इसे ईरान के लिए “बड़ा दिन” बताया और अमेरिकी सेना की ताकत की तारीफ की। इसके अलावा फाइनेंशियल टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने ईरान के तेल संसाधनों और यूरेनियम को लेकर बड़े सैन्य अभियान के संकेत भी दिए हैं।
ईरान की खुली धमकी: अमेरिका का इंतजार
दूसरी ओर, ईरान भी पूरी तरह आक्रामक हो चुका है। ईरान की नेवी के कमांडर ने धमकी दी है कि जैसे ही USS Abraham Lincoln ईरानी जल सीमा के करीब आएगा, उस पर मिसाइल हमला किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि “शहीदों के खून का बदला खून से लिया जाएगा।” ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उसके द्वीपों या उसकी धरती पर जमीनी हमला हुआ, तो वह बाब अल‑मंडेब जलडमरूमध्य को बंद कर देगा।
बाब अल‑मंडेब बंद हुआ तो दुनिया पर असर
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पहले ही लगभग ठप है, जिससे तेल की कीमतों में उछाल आया है। अब अगर बाब अल‑मंडेब भी बंद हुआ, तो वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 9 से 12% खतरे में पड़ जाएगा। इससे जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे लागत और समय दोनों 40% तक बढ़ सकते हैं।
युद्ध का दायरा बढ़ने का खतरा
USS ट्रिपोली की एंट्री के साथ ही पश्चिमी एशिया की यह जंग अब केवल स्टैंड‑ऑफ वॉर नहीं रह गई है। हालात साफ इशारा कर रहे हैं कि अगर बातचीत विफल हुई, तो अमेरिका और ईरान के बीच सीधी जमीनी टक्कर भी देखने को मिल सकती है—और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।