Iran-Israel War: ईरान के खिलाफ जंग में हांफने लगा इजरायल, सैनिकों की होने लगी कमी

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  • प्रकाशित: मार्च 27, 2026

पश्चिम एशिया में जंग की आग थमने का नाम नहीं ले रही है. इस बीच इजरायल से एक बड़ी खबर सामने आई है. इजरायली रक्षा बल (IDF) के सैन्य प्रवक्ता ने स्वीकार किया है कि सेना में गंभीर कमी है. प्रवक्ता के अनुसार, इस समय करीब 15 हजार सैनिकों की कमी बनी हुई है, जबकि युद्ध संचालन के लिए 7 से 8 हजार प्रशिक्षित लड़ाकू सैनिकों की तत्काल जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले अभियानों के लिए तैयार रहना होगा, हालांकि फिलहाल सैनिकों की कमी एक बड़ी चुनौती है.

इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा है. वह ईरान के साथ-साथ लेबनान में भी जोरदार हमले कर रहा है. इजरायली पक्ष का कहना है कि वह लेबनानी संगठन हिज़्बुल्लाह के साथ भी वैसा ही व्यवहार करेगा, जैसा गाज़ा में हमास के खिलाफ किया गया.

उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भले ही ईरान के खिलाफ कड़े बयान दे रहे हों, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि ईरान, इजरायल और लेबनान के बीच सीधे तौर पर बम और रॉकेटों की अदला‑बदली जारी है. बुधवार देर रात लेबनान ने एक बार फिर इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उत्तरी इजरायल के हाइफा शहर पर कई रॉकेट दागे. बताया गया कि इनमें से कई रॉकेटों को इजरायल के रक्षा कवच ने हवा में ही नष्ट कर दिया. इसके बावजूद शहर के आसमान में धमाकों का नजारा देखा गया.

गुरुवार को हिज़्बुल्लाह की ओर से नाहारिया में भी हमले किए गए, जिनमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए हैं. वहीं जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी इलाकों पर हमले तेज कर दिए. दक्षिणी तटीय शहर टायर में इजरायली हवाई हमलों में कई इमारतें तबाह हो गईं. हालात इतने भयावह हैं कि अब तक करीब 10 लाख लोग इस इलाके को छोड़कर पलायन कर चुके हैं.

इन हालातों के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं. मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देल लट्टी ने गुरुवार को बेरूत में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ ओन से मुलाकात की. मिस्र ने कहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच शांति बनाए रखने और बातचीत का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है. फिलहाल, सवाल यही है कि क्या बातचीत के जरिए शांति की राह निकलेगी, या फिर पश्चिम एशिया बमों की बारिश में और झुलसता रहेगा.

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